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कवर्धा में 227 मुनारों का निर्माण, वन सीमा अब होगी साफ, अतिक्रमण पर कसेगा शिकंजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल ने वन संरक्षण की दिशा में अहम पहल करते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 में कैम्पा मद के तहत 227 नए मुनारों यानी बाउंड्री पिलरों का निर्माण पूरा कर लिया है। यह पहल सिर्फ जमीन के सीमांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि वन क्षेत्र की सुरक्षा, प्रबंधन और कानूनी मजबूती को भी नया आधार देती है।

परियोजना के तहत संवेदनशील और महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में मजबूत एवं टिकाऊ मुनारे स्थापित किए गए हैं, ताकि वन सीमाएं स्पष्ट रूप से चिन्हित रह सकें। इससे वन अमले, गश्ती दल और वन रक्षकों को निगरानी में आसानी होगी और अवैध गतिविधियों पर अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रण लगाया जा सकेगा। निरीक्षण के दौरान प्रबंध संचालक एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार ने इस कार्य की सराहना भी की।

अब तक कई जगहों पर वन सीमा स्पष्ट नहीं होने के कारण ग्रामीणों और वन विभाग के बीच विवाद की स्थिति बन जाती थी। नए मुनारों के निर्माण से वन भूमि की पहचान आसान होगी, जिससे अवैध कब्जों, अतिक्रमण और वन संपदा की चोरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही, सीमांकन स्पष्ट होने से कार्रवाई में तेजी और पारदर्शिता आएगी। विवाद की स्थिति में ये मुनारे कानूनी साक्ष्य के रूप में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

कवर्धा परियोजना मंडल की यह पहल बताती है कि वन संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन को लेकर सरकार गंभीर है। यह कदम न केवल जंगलों की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन में भी सहायक साबित होगा।

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