A centuries-old mystery unearthed in Surguja! Rare tantric and religious manuscripts unearthed from the Dhourpur royal family

सरगुजा में मिला सदियों पुराना रहस्य! धौरपुर राजपरिवार से निकली दुर्लभ तांत्रिक और धार्मिक पांडुलिपियां

रायपुर। सरगुजा जिले में चल रहे ज्ञानभारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान लगातार ऐतिहासिक और दुर्लभ धरोहरें सामने आ रही हैं। जिले के अलग-अलग इलाकों से ताड़पत्रों पर लिखी रामायण, महाभारत, पुराण, तंत्र-मंत्र और साधना से जुड़ी कई प्राचीन पांडुलिपियों का संग्रह और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इसी कड़ी में धौरपुर के पूर्व राजपरिवार से 11 बेहद दुर्लभ धार्मिक और तांत्रिक पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं।

जानकारी मिलने पर जिला पंचायत सीईओ और अभियान के जिला नोडल अधिकारी विनय अग्रवाल अंबिकापुर स्थित पांडुलिपि संरक्षक मार्तण्ड सिंह देव के निवास पहुंचे। यहां आदित्य सिंह देव ने इन पांडुलिपियों के इतिहास और महत्व की विस्तृत जानकारी दी।

बताया गया कि कवि स्वर्गीय रामनाथ भट्ट ने महाराजा रघुनाथ शरण सिंह देव के आदेश पर वर्ष 1959 में 62 पृष्ठों की अर्कसेल वंशावली तैयार की थी। वहीं सूर्य प्रताप सिंह देव के निर्देश पर वनदुर्गा महाविद्या, काली तंत्र और यंत्र-मंत्र वशीकरण मंत्र जैसी विशेष पांडुलिपियों का लेखन कराया गया था।

अभियान के दौरान वर्ष 1842 में लिखित वनदुर्गा महामंत्र पांडुलिपि भी सामने आई है। इसके अलावा नीलकंठ स्तोत्र, अदकाली तंत्र, महामोहन मंत्र, विष्णु सहस्त्रनाम रुद्रशाप विमोचन मंत्र और हनुमान स्तोत्र जैसी कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां संरक्षित अवस्था में मिली हैं।

विनय अग्रवाल ने पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण और पोर्टल अपलोडिंग प्रक्रिया का अवलोकन करते हुए कहा कि यह अभियान भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ी पहल है। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां केवल आस्था नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं।

एन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जगदलपुर से पहुंचे प्रभारी अधिकारी हरनेक सिंह ने भी इन पांडुलिपियों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान सर्वेक्षकों को पांडुलिपि अपलोडिंग का प्रशिक्षण भी दिया गया।

4rtheye web Desk
4rtheye web Desk
Articles: 18504

Leave a Reply