तेहरान में रोष का सैलाब! खामेनेई के जनाजे में उमड़े लाखों लड़ाके, कसम खाई—’अमेरिका-इजराइल के वजूद को मिटाकर ही दम लेंगे!’
खामेनेई का अंतिम संस्कार और वैश्विक तनाव

मध्य पूर्व (West Asia) के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक जनाजा आज तेहरान की सड़कों पर देखा जा रहा है। फरवरी 2026 में अमेरिकी और इजरायली मिसाइल हमलों में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान पूरा ईरान न केवल आंसुओं में डूबा है, बल्कि प्रतिशोध की आग में धधक रहा है। तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला (Grand Mosallah) से लेकर कशहान और पवित्र शहर कौम (Qom) तक, लाखों की संख्या में ईरानी नागरिक, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडो और ब्लैक-सूट पहने आत्मघाती दस्ते सड़कों पर उतरे हैं। आसमान ‘मरग बर अमरिका’ (अमेरिका मुर्दाबाद) और ‘मरग बर
इसराइल’ (इजराइल मुर्दाबाद) के गगनभेदी नारों से गूंज रहा है।
इस अंतिम संस्कार ने कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ईरान ने इस मौके पर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का आक्रामक प्रदर्शन करने के लिए इस्तेमाल किया है। खामेनेई के ताबूत के ठीक पीछे ईरान की सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक मिसाइलों ‘फत्ताह-2’ और ‘खैबर शेकन’ का प्रदर्शन किया गया, जिन पर साफ अक्षरों में लिखा था—”यरूशलम और वाशिंगटन के लिए सीधे टिकट।” नए कार्यवाहक ईरानी नेतृत्व ने इस जनाजे को एक ‘धार्मिक कूटनीतिक युद्धक्षेत्र’ में बदल दिया है। रूस, चीन, सीरिया और यमन के हुथी विद्रोहियों के शीर्ष प्रतिनिधिमंडलों ने इस जनाजे में शामिल होकर पश्चिमी ताकतों को खुला चैलेंज दिया है।
इस बीच, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं क्योंकि अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने इस जनाजे के दौरान तेहरान में एकत्रित हुए ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ (हिजबुल्लाह, हमास और हुथी) के शीर्ष कमांडरों को एक साथ निशाना बनाने का गुप्त प्लान तैयार किया था। हालांकि, रूस की एस-400 और ईरान की स्वदेशी ‘बावर-373’ वायु रक्षा प्रणालियों ने पूरे तेहरान के आसमान को ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ में तब्दील कर रखा है।
ईरान के अंतरिम सर्वोच्च नेता ने जनाजे की नमाज के बाद सीधे शब्दों में वाशिंगटन को ललकारते हुए कहा कि अमेरिका यह न समझे कि खामेनेई की मौत से ईरान कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा, “हमारे नेता का खून हर उस अमेरिकी ठिकाने को राख कर देगा जो हमारी सीमाओं के आसपास मौजूद है।” यह अंतिम संस्कार किसी नेता की विदाई नहीं, बल्कि पश्चिम के खिलाफ एक नए, संगठित और कहीं अधिक क्रूर कूरिल्ला युद्ध का खुला शंखनाद है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।


