‘भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ पड़ा भारी’: लाल सागर से फारस की खाड़ी तक गर्जा नौसेना का पराक्रम, महाशक्तियों ने माना भारत की कूटनीतिक धमक का लोहा

मध्य पूर्व में जारी भयंकर सैन्य महासंग्राम और युद्ध की भीषण लपटों के बीच भारत ने अपनी दृढ़ कूटनीति, अदम्य सैन्य शक्ति और निर्भीक विदेश नीति का लोहा पूरी दुनिया में मनवा लिया है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के त्रिकोणीय युद्ध के कारण जब दुनिया की तमाम महाशक्तियाँ और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पंगु हो चुकी हैं, तब भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है, जिसने दुश्मन ताकतों को बैकफुट पर धकेल दिया है। भारतीय नौसेना के ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत अरब सागर, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में तैनात स्वदेशी स्टेल्थ विध्वंसक युद्धपोतों (Guided Missile Destroyers) ने भारतीय व्यापारिक जहाजों को एक भी खरोंच आए बिना सुरक्षित गलियारा प्रदान किया है।
भारत की इस आक्रामक और संप्रभु कूटनीति का ही परिणाम है कि अमेरिका और ईरान, दोनों ही विरोधी खेमे भारत की शर्तों को मानने और भारतीय हितों का सम्मान करने पर मजबूर हुए हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ विश्वेश नेगी को तेहरान में भारत का नया राजदूत नियुक्त किए जाने के बाद भारत ने ईरान के साथ अपनी रणनीतिक बातचीत को और मजबूत किया है, जिससे फारस की खाड़ी में भारतीय ऊर्जा आपूर्ति और चाबहार बंदरगाह के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी है। जब ईरान ने पश्चिमी देशों के जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगाए और अमेरिका ने आर्थिक नाकेबंदी की कोशिश की, तब भारत ने यह साफ संदेश वाशिंगटन और तेहरान दोनों को दे दिया कि भारतीय नौवहन और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर आंच आई तो भारत सख्त से सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
पश्चिम के दबाव को पूरी तरह से खारिज करते हुए भारत ने ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ (रणनीतिक स्वायत्तता) का परिचय दिया है। भारत ने न केवल अपनी तेल और गैस की जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित समुद्री मार्गों को नियंत्रित किया है, बल्कि वैश्विक मंचों पर युद्धरत देशों को सख्त लहजे में संघर्षविराम और शांति की हिदायत भी दी है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की स्पेशल मरीन कमांडो (MARCOS) और अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत पूरी मुस्तैदी से डटे हुए हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘भारत किसी के दबाव में नीति नहीं बनाता, भारत की विदेश नीति का एक ही पैमाना है—भारत का राष्ट्रहित’। भारतीय नौसेना का हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ का रूप देखकर अमेरिका और इजराइल ने भी भारत की रणनीतिक श्रेष्ठता को स्वीकार किया है। भीषण युद्ध के माहौल में भी भारत ने नेपाल, भूटान, श्रीलंका और बांग्लादेश को ईंधन आपूर्ति जारी रखकर एक सच्चे क्षेत्रीय नेता और ‘विश्वगुरु’ की अपनी भूमिका को और मजबूत किया है। महाशक्तियों के युद्ध के बीच भारत का यह निडर और आक्रामक रुख यह साबित करता है कि आज का भारत किसी का मोहरा नहीं, बल्कि दुनिया की दिशा तय करने वाला एक शक्तिशाली वैश्विक केंद्र बन चुका है।



