‘समुद्र का पानी लाल कर देंगे’: हुथियों ने लाल सागर में दागी बैलिस्टिक मिसाइलें, तेल टैंकरों में लगी आग से दहला मिडिल ईस्ट

मध्य पूर्व में भड़की युद्ध की आग अब लाल सागर की अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन को निगलने पर आमादा है। ईरान समर्थित यमन के हुथी विद्रोहियों ने लाल सागर में भीषण हमला बोलते हुए सऊदी अरब के दो विशाल तेल टैंकरों पर एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन से हमला कर दिया। यमन के तट के करीब ‘यान्बू’ (Yanbu) क्षेत्र के पास हुए इस हमले में ‘वफ़ा’ (Wafa) नामक सऊदी तेल टैंकर में भीषण आग लग गई, जिससे पूरे लाल सागर में धुएं का गुबार और तेल का रिसाव फैल गया। हुथी सैन्य प्रवक्ता यह्या सारी ने एक वीडियो संदेश जारी कर हुंकार भरते हुए कहा कि यह सऊदी अरब की नाकेबंदी और अमेरिका-इजराइल की आक्रामकता का माकूल जवाब है।
हुथी लड़ाकों ने स्पष्ट चुनौती दी है कि जब तक पश्चिम एशिया में अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमले बंद नहीं होते, तब तक लाल सागर से गुजरने वाले किसी भी दुश्मन जहाज को बख्शा नहीं जाएगा। हुथियों का दावा है कि पिछले कुछ हफ्तों के भीतर उन्होंने सऊदी अरब और पश्चिमी सहयोगियों के नौ तेल टैंकरों को निशाना बनाकर समुद्र के हवाले किया है। इस हमले के बाद लाल सागर का समुद्री मार्ग युद्धक्षेत्र बन गया है, जिससे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर के रास्ते अपने जहाजों की आवाजाही तुरंत रोक दी है।
मिसाइल हमले की खबर मिलते ही लाल सागर में गश्त कर रहे अमेरिकी नौसेना के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हुथी ठिकानों पर टॉमहॉक मिसाइलें दागीं, लेकिन हुथी विद्रोहियों का दुस्साहस कम होता नहीं दिख रहा है। सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के आपूर्ति नेटवर्क पर इस हमले का सीधा असर पड़ा है। इस घटना ने वैश्विक रसद प्रणालियों (Global Supply Chains) की रीढ़ तोड़ दी है, क्योंकि मालवाहक जहाजों को अब अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ का लंबा और खर्चीला चक्कर लगाना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हुथियों के इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है, लेकिन यमन के पहाड़ और तटीय इलाकों से हुथी लड़ाके लगातार पश्चिमी जहाजों पर घात लगाकर हमले कर रहे हैं। लाल सागर में इस ताजा समुद्री हमले ने यह साबित कर दिया है कि मध्य पूर्व का संघर्ष अब सिर्फ फारस की खाड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाल सागर से लेकर बाब-अल-मंदेब की जलडमरूमध्य तक जलमार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो चुके हैं। यदि स्थिति पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो दुनिया को एक अभूतपूर्व ईंधन और माल ढुलाई संकट का सामना करना पड़ेगा।



