10,000 करोड़ की ब्रह्मोस डील से दुश्मनों का काल! भारतीय सेना का महा-ऑपरेशन, अब सीमा पार तबाही पक्की

भारतीय थल सेना ने अपने मारक दस्ते को अत्याधुनिक और अत्यंत घातक बनाने के लिए इतिहास के सबसे बड़े सौदों में से एक को हरी झंडी दे दी है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत से 150 एक्स्टेंडेड-रेंज (Extended Range) ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है। 450 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज (2.8 मैक) रफ्तार से हमला करने वाली यह सुपरसोनिक मिसाइलें भारतीय सेना को सीमा पार दुश्मनों के कमान सेंटरों, बंकरों और रडार स्टेशनों को चुटकी में नेस्तनाबूद करने की अचूक क्षमता प्रदान करेंगी।
पिछले 24 घंटों में रक्षा गलियारों से आई इस बड़ी खबर ने भारत के विरोधियों के होश फाख्ता कर दिए हैं। भारतीय सेना के इस ऐतिहासिक फैसले से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारत का पलड़ा अत्यंत भारी हो गया है। एक्स्टेंडेड-रेंज ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक क्रूज मिसाइल प्रणाली मानी जाती है, जिसे इंटरसेप्ट करना किसी भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए नामुमकिन के बराबर है। इस मेगा डील के साथ ही भारतीय सेना ने अपनी पिनाका रॉकेट प्रणालियों और लंबी दूरी के आर्टिलरी सिस्टम को भी इंटीग्रेटेड फायरपावर नेटवर्क में तब्दील करने का महा-अभियान शुरू कर दिया है।
भारतीय सेना का यह आक्रामक मेक-ओवर यह दर्शाता है कि भारत अब रक्षा के मामले में केवल रक्षात्मक रुख नहीं अपनाएगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों पर विनाशकारी प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक (Pre-emptive Strike) करने से भी पीछे नहीं हटेगा। 10,000 करोड़ रुपये का यह निवेश देश की मेक-इन-इंडिया रक्षा पहल को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान कर रहा है। भारत की इस गरजती हुई सैन्य क्षमता और आधुनिक हथियारों के बेड़े ने यह साफ कर दिया है कि भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ करने की हिम्मत करने वाले किसी भी देश को इसकी भारी और विनाशकारी कीमत चुकानी पड़ेगी।




