ओडेसा फिर बना निशाना, यूक्रेन की ऊर्जा और बंदरगाह व्यवस्था पर बड़ा हमला

एक तरफ शांति की बातें और दूसरी तरफ रातभर आसमान में ड्रोन और मिसाइलें—रूस और यूक्रेन का युद्ध एक बार फिर उस बिंदु पर पहुंचता दिख रहा है जहां हर हमला अगले हमले की जमीन तैयार कर रहा है।
9 अगस्त की रात दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ बड़े हवाई हमले किए। AP के मुताबिक यूक्रेन के बेलगोरोद क्षेत्र में ड्रोन हमले में पांच लोगों की मौत हुई और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके जवाब में रूस ने खार्किव और ओडेसा पर मिसाइल हमले किए, जिनमें दो लोगों की मौत और 21 लोग घायल हुए।
ओडेसा इस हमले का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहा।
Reuters के अनुसार रूसी हमले से ओडेसा बंदरगाह को नुकसान पहुंचा और कई लोग घायल हुए। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस के हमले वैश्विक खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकते हैं क्योंकि ओडेसा यूक्रेन के कृषि निर्यात का प्रमुख केंद्र है।
रूस का दावा क्या है?
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसके हमलों का लक्ष्य यूक्रेनी सैन्य ढांचे से जुड़े ईंधन ठिकाने और ड्रोन भंडारण क्षेत्र थे। दूसरी तरफ यूक्रेन ने रूस के सैन्य और ऊर्जा ढांचे पर हमलों का दावा किया।
यानी दोनों पक्ष एक ही रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं—दुश्मन की सैन्य क्षमता और लॉजिस्टिक्स को कमजोर करो।
इस युद्ध का नया खतरनाक मोड़
अब हमला सिर्फ सैनिक ठिकानों तक सीमित नहीं दिख रहा।
- बंदरगाह निशाने पर हैं
- ऊर्जा ढांचा प्रभावित हो रहा है
- ईंधन सुविधाओं पर हमले हो रहे हैं
- ड्रोन उत्पादन और भंडारण केंद्र निशाने पर हैं
- सीमावर्ती इलाकों तक युद्ध का प्रभाव पहुंच रहा है
यूक्रेन के अनुसार ओडेसा में बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। AP ने बताया कि यूक्रेन को बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए Patriot सिस्टम की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
भारत पर असर
भारत के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध का असर तेल, खाद्यान्न, उर्वरक, शिपिंग और वैश्विक बाजारों तक जाता है। ओडेसा जैसे बंदरगाहों पर लगातार हमले वैश्विक अनाज आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के लिए एक और चिंता यह है कि युद्ध जितना लंबा चलेगा, रूस और पश्चिम के बीच टकराव उतना ही गहरा होगा। इसका असर भारत-रूस व्यापार और रक्षा संबंधों पर भी पड़ सकता है।




