हरितालिका तीज 2026: सुहागिनों के लिए क्यों खास है यह निर्जला व्रत? जानें पूजा विधि और नियम

(Fourth Eye News): भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज मनाई जाती है। यह पर्व पति की लंबी उम्र, सुखी दाम्पत्य जीवन और मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए जंगल में जाकर निर्जला और निराहार रहकर कठोर तपस्या की थी। हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पूजन किया था, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
हरितालिका तीज के मुख्य नियम
निर्जला व्रत: यह व्रत पूरी तरह से निर्जला (बिना पानी के) रखा जाता है।
फुलेरा और रात्रि जागरण: घर में फुलेरा सजाकर शिव-पार्वती की बालू या मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है और रात भर भजन-कीर्तन किया जाता है।
पारणा नियम: अगले दिन सुबह विधिवत पूजा और आरती के बाद ही व्रत का पारणा किया जाता है।


