15 अगस्त 1947 को लाल किले पर क्यों नहीं गाया गया था ‘जन गण मन’? जानिए हमारे राष्ट्रगान के अंगीकार की पावन कथा!

(Fourth Eye News): जब-जब सामूहिक स्वर में ‘जन गण मन’ की ध्वनियां गूंजती हैं, तब-तब हर भारतीय का मन राष्ट्रभक्ति की दिव्य भावना से ओतप्रोत हो जाता है। आँखों के सामने वीर शहीदों के बलिदान और भारत माता का विशाल स्वरूप तैरने लगता है। परंतु क्या आप यह ऐतिहासिक तथ्य जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को जब देश आज़ाद हुआ, तब लाल किले पर यह राष्ट्रगान नहीं गाया गया था?
1947 में क्यों नहीं था कोई आधिकारिक राष्ट्रगान?
विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर जी ने वर्ष 1911 में ही ‘जन गण मन’ की रचना कर दी थी और इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशनों में गाया भी जाता था। परंतु 15 अगस्त 1947 तक इसे आधिकारिक रूप से भारत के ‘राष्ट्रगान’ (National Anthem) का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ था। आज़ादी के उस पावन दिन विभिन्न देशभक्ति गीतों और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष से गगन को गुंजायमान किया गया था।
24 जनवरी 1950: जब मिला संवैधानिक सम्मान
आज़ादी के ढाई साल बाद, जब हमारा महान संविधान बनकर तैयार हुआ, तब 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अंतिम सत्र में सर्वसम्मति से ‘जन गण मन’ को भारत का आधिकारिक राष्ट्रगान और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय रचित ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया। राष्ट्रगान की 52 सेकंड की यह पावन धुन आज भी 140 करोड़ भारतीयों के दिलों को एक साथ धड़काती है।



