रेलवे की ‘कवच 4.0’ से थर-थर कांपेंगे हादसे! भारतीय रेल की स्वदेशी धकड़ का नया अवतार

भारतीय रेल पर सवाल उठाने वाले विरोधियों के गाल पर यह खबर एक करारा तमाचा है! 23 सितंबर को दक्षिण मध्य रेलवे के मलकाजगिरि-कामारेड्डी सेक्शन पर रेलवे ने स्वदेशी एंटी-कोलिजन सिस्टम ‘कवच 4.0’ (Kavach 4.0) को आधिकारिक तौर पर पटरी पर उतार दिया है। 108 किलोमीटर लंबे इस रूट पर इस घातक सुरक्षा कवच की शुरुआत ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब तकनीक मांगने वाला देश नहीं, बल्कि खुद दुनिया को दिशा दिखाने वाला महारथी बन चुका है।
जब ट्रेनें पटरी पर दौड़ती हैं, तो इंसानी भूल या कोई भी तकनीकी चूक अब हादसों की वजह नहीं बन पाएगी। कवच 4.0 पूरी तरह से स्वचालित (Automatic Train Protection) प्रणाली पर काम करता है, जो लाल सिग्नल पार करने से पहले ही ट्रेन में अपने-आप ब्रेक लगा देता है। विपक्षी दलों और भारत की संप्रभुता पर उंगली उठाने वाली ताकतों को इस बार फिर मुंह की खानी पड़ी है। भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने दिन-रात एक करके इस स्वदेशी तकनीक को इस स्तर पर पहुंचाया है कि अब दुनिया के बड़े-बड़े देश भी भारत की इस महारत को देखकर दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं।
यह महज एक शुरुआत है। भारतीय रेलवे का लक्ष्य देश के हर कोने और हर व्यस्त रूट को कवच 4.0 के शिकंजे में कसना है, ताकि देश के किसी भी नागरिक की जान का एक कतरा भी लापरवाही की भेंट न चढ़े।
भारत ने एक बार फिर दिखा दिया है कि जब आत्मनिर्भर बनने की ठान ली जाए, तो पश्चिम की कोई भी तकनीक हमारी बराबरी नहीं कर सकती। भारतीय रेल का यह नया अवतार न सिर्फ सुरक्षित सफर का वादा करता है, बल्कि पूरे भारत के उस बुलंद हौसले की कहानी लिखता है जो किसी के सामने झुकना नहीं जानता।



