वाशिंगटन में शी जिनपिंग की ट्रम्प के आगे गुहार, अमेरिकी टेक कंपनियों ने चीन के मंसूबों पर फेरा पानी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का तीन दिवसीय अमेरिकी दौरा आज 25 सितंबर की सुबह समाप्त हो गया। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के ‘स्टेट डिनर’ और बैठकों के दौरान चीन ने अमेरिका के सामने हाथ फैलाने और टैरिफ में राहत मांगने का हर संभव प्रयास किया। हालांकि दोनों देश 10 जनवरी तक व्यापार युद्ध विराम (Trade Truce) बढ़ाने पर सहमत हुए, लेकिन अमेरिका ने हाई-टेक सेमीकंडक्टर्स और एआई तकनीकों पर ढील देने से साफ इनकार कर दिया।
चीन की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जिनपिंग अमेरिकी टेक दिग्गजों (Apple, Meta, Nvidia) के सामने गिड़गिड़ाते नजर आए। अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों और टेक कंपनियों ने चीन के “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)” खतरे को देखते हुए कड़े प्रतिबंध बरकरार रखे हैं। वहीं दूसरी ओर, चीन के इस तकनीकी बहिष्कार का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिल रहा है। ‘एप्पल’ और अन्य दिग्गज टेक ब्रांड्स अब चीन को छोड़कर भारत को अपना ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बना चुके हैं। भारत की आर्थिक और कूटनीतिक नीति ने चीन को बैकफुट पर धकेल दिया है, और अमेरिका भी अब यह समझ चुका है कि बीजिंग का मुकाबला केवल एक मजबूत और मजबूत ‘भारत’ ही कर सकता है।
चीन अब पूरी तरह से पश्चिमी प्रतिबंधों के जाल में फंस चुका है और उसकी आर्थिक दादागिरी का अंत शुरू हो गया है।
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