ईरान ने खोला कूटनीति का दरवाजा, ट्रंप ने ठुकराया प्रस्ताव! क्या होर्मुज की खाड़ी बनेगी अगली जंग का मैदान?

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें हैं तो दूसरी तरफ सैन्य टकराव और समुद्री रास्तों पर नियंत्रण का संघर्ष। ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और युद्ध रोकने का सात दिवसीय रोडमैप रखा, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अस्वीकार कर दिया।
27 सितंबर को अल जज़ीरा की लाइव रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान अभी भी अमेरिकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है। दूसरी ओर ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार्य नहीं बताया।
होर्मुज पर टकराव क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में बाधा का असर तेल परिवहन, समुद्री बीमा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बातचीत को लेकर अविश्वास जताया है। उनका कहना है कि पिछले दौर की बातचीत के बाद हमले और प्रतिबंध जारी रहे। इस बीच अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई तथा ईरान की जवाबी रणनीति ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाया है।
ये खबर भी पढ़ें
क्या युद्धविराम की कोई संभावना बची है?
ईरान की ओर से सात दिन का प्रस्ताव सामने आना बातचीत का एक रास्ता जरूर दिखाता है, लेकिन अमेरिका की अस्वीकृति और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास किसी तत्काल समझौते को कठिन बनाते हैं। इस समय यह कहना जल्दबाजी होगी कि युद्धविराम होने जा रहा है या संघर्ष और व्यापक होगा।
होर्मुज का संकट अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव नहीं रह गया है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिकी जवाब, ईरान की अगली कूटनीतिक पहल और समुद्री मार्ग की स्थिति निर्णायक घटनाक्रम होंगे।




