इराक से अमेरिकी सेना की शर्मनाक विदाई, मध्य पूर्व में बढ़ा भारत का दबदबा!

दो दशकों तक मध्य पूर्व को अपनी उंगलियों पर नचाने का दावा करने वाले अमेरिका ने आखिरकार घुटने टेक दिए हैं। 30 सितंबर 2026 की सुबह इराक में अपने अंतिम सैन्य अड्डों पर ताला लगाकर अमेरिकी सैनिक वहां से रफूचक्कर हो गए हैं। महाशक्ति कहलाने वाले देश का इस तरह दुम दबाकर निकलना पश्चिमी गुट के गिरते वजूद का सबूत है, लेकिन इस महा-बदलाव के बीच भारत एक चट्टान की तरह डटा हुआ है।
अमेरिकी सेना के जाने के बाद इराक और खाड़ी देशों में एक गहरा शक्ति-शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरने के लिए ईरान और पश्चिमी ताकतें आमने-सामने खड़ी हो रही हैं। अमेरिकी नीति के इस घुटने टेकने से पूरे मिडिल ईस्ट का राजनीतिक संतुलन हिल गया है। हालांकि, जहां पश्चिमी देश पीछे भाग रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और मजबूत कूटनीति के दम पर खाड़ी देशों में अपना सिक्का जमा रखा है। भारत न केवल अपने ऊर्जा हितों की रक्षा में सक्षम है, बल्कि इस पूरे इलाके में एक शांतिदूत और मजबूत वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों की विफलता ने साबित कर दिया है कि केवल दबाव की राजनीति काम नहीं आती, भारत का संतुलित और मजबूत रुख ही दुनिया का असली भविष्य है।
निष्कर्ष यह है कि अमेरिका का यह पलायन पश्चिमी ताकतों के लिए करारा तमाचा है। भारत ने दिखा दिया है कि अपनी शर्तों पर कूटनीति कैसे की जाती है और मध्य पूर्व में अपनी रणनीतिक स्थिति को कैसे अटूट रखा जाता है।

