छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में प्रशासनिक तानाशाही और वकीलों के बीच का विवाद आज चरम पर पहुंच गया। विवादित हरदीबाजार तहसीलदार को तत्काल पद से हटाकर कार्यमुक्त न किए जाने के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ ने आज से न्यायिक कार्यों का पूरी तरह से बहिष्कार शुरू कर दिया है। वकीलों के इस उग्र कदम के कारण पूरे जिले की अदालती व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है और दूर-दराज से आए आम फरियादी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। संघ ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि 30 अक्टूबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 2 नवंबर से तहसील और राजस्व न्यायालयों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी कर दी जाएगी। प्रशासनिक भ्रष्टाचार और हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए वकीलों का यह आक्रामक रुख अब सीधे तौर पर शासन-प्रशासन के इकबाल को चुनौती दे रहा है।
न्यायिक व्यवस्था का यह टकराव यह साबित करता है कि स्थानीय प्रशासन की कारगुजारियों से जनता और कानून के रखवाले दोनों आजिज आ चुके हैं। अगर समय रहते बीच-बचाव नहीं हुआ, तो यह प्रशासनिक और न्यायिक संकट पूरे प्रदेश में फैल सकता है।
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