वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल आने वाले वर्षों में प्रदेश के विकास का प्रमुख इंजन बनेगा। हाउसिंग बोर्ड को केवल आवास निर्माण तक सीमित न रखकर सड़क, पुल, खेल अधोसंरचना, सार्वजनिक भवनों, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी।
विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए मंडल को परंपरागत कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर नवाचार, आधुनिक तकनीक, वित्तीय प्रबंधन और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनानी होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार मंडल को आर्थिक रूप से सुदृढ़, आत्मनिर्भर और बहुआयामी संस्था के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
ऋण मुक्ति: राज्य सरकार के सहयोग से लगभग 700 करोड़ रुपये की लंबित ऋण देनदारी समाप्त की गई, जिससे मंडल को बड़े वित्तीय दबाव से राहत मिली।
संपत्ति विक्रय: वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना और प्रभावी विपणन के माध्यम से बड़ी संख्या में रिक्त संपत्तियों का विक्रय किया गया।
नई परियोजनाएं: पर्याप्त मांग और बुकिंग (आरंभिक तीन माह में 30 प्रतिशत या कुल 60 प्रतिशत बुकिंग) के आधार पर ही अब नई आवासीय परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
क्षेत्र विस्तार: हाउसिंग बोर्ड अब केवल आवास तक सीमित न रहकर सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, स्टेडियम और सार्वजनिक भवनों के निर्माण में विशेषज्ञता हासिल करेगा। साथ ही आगामी दो वर्षों में छत्तीसगढ़ के बाहर भी परियोजनाएं प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
नवाचारी मॉडल: पीपीपी और टीपीएस (टाउन प्लानिंग स्कीम) मॉडल के जरिए वित्तीय बोझ कम करते हुए व्यवस्थित शहरी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। सेरीखेड़ी परियोजना में पीपीपी मॉडल के माध्यम से लगभग 94 एकड़ भूमि की बचत का उदाहरण सामने आया है।
विशेष प्रशिक्षण: कार्यशाला में आईआईएम रायपुर, आईआईआईटी नवा रायपुर और एनआईटी रायपुर के विशेषज्ञों द्वारा प्रशासनिक दक्षता, आधुनिक तकनीक, एआई, वित्तीय प्रबंधन और संपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया।
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