रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय और संबल प्रदान करने के उद्देश्य से रायपुर जिले के मामलों पर वृहद जनसुनवाई का आयोजन किया गया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में आयोजित इस सुनवाई में संभाग प्रभारी सदस्य श्रीमती सरला कोशरिया और सदस्य ओजस्वी मंडावी की उपस्थिति में कुल 28 प्रकरणों पर गहन विचार-विमर्श कर संवेदनशील निर्णय लिए गए। इनमें से 7 मामलों का पूर्ण निराकरण करते हुए उन्हें नस्तीबद्ध (फाइल बंद) किया गया।
12 साल तक शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण, FIR दर्ज
जनसुनवाई के दौरान एक बेहद गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई। आवेदिका ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अनावेदक द्वारा पिछले 12 वर्षों से शादी का झांसा देकर उसका दैहिक शोषण किया जा रहा था, चरित्र हनन किया गया और अंततः शादी से इनकार कर दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने थाना प्रभारी टिकरापारा (रायपुर) को तत्काल जांच के निर्देश दिए थे। आयोग के निर्देशानुसार आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 64(2)(m) एवं पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जनसुनवाई के अन्य प्रमुख मामलों पर लिए गए निर्णय:
- 5 लाख रुपये और स्त्रीधन वापसी का समझौता: एक वैवाहिक विवाद में आवेदिका ने पति के साथ रहने से इनकार करते हुए स्त्रीधन की मांग की। आयोग की मध्यस्थता के बाद अनावेदक 4 नवंबर को एकमुश्त 5 लाख रुपये देने पर सहमत हुआ। वहीं, 31 अक्टूबर को महिला पुलिस व सखी वन स्टॉप सेंटर की मौजूदगी में ससुराल से सामान वापस दिलाने के निर्देश दिए गए।
- संपत्ति में हक: एक अन्य मामले में आयोग के पूर्व निर्णय के तहत ग्राम बिरकोनी स्थित 2 एकड़ खेत और छेरीखेड़ी स्थित 1 मकान को एक माह के भीतर आवेदिका के नाम पर रजिस्ट्री कराने के कड़े निर्देश दिए गए।
- बच्चों की टीसी दिलाने के निर्देश: घरेलू हिंसा व भरण-पोषण के एक मामले में अनावेदक द्वारा बच्चों का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) नहीं दिया जा रहा था। बच्चों की इच्छा अनुसार उन्हें मां के साथ रहने की अनुमति देते हुए अनावेदक को तुरंत टीसी सौंपने का आदेश दिया गया।
- दिव्यांग महिला की लिफ्ट मरम्मत: एक दिव्यांग आवेदिका को खरीदी गई लिफ्ट की सर्विसिंग न मिलने के कारण भारी असुविधा हो रही थी। अनावेदक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी लापरवाही स्वीकार की और नवंबर माह तक लिफ्ट ठीक करने की मोहलत मांगी।
- निःशुल्क विधिक सहायता: शराब पीकर मारपीट करने वाले पति से परेशान आवेदिका को भरण-पोषण और तलाक की कानूनी प्रक्रिया के लिए आयोग ने विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क वकील उपलब्ध कराने के निर्देश देकर मामला नस्तीबद्ध किया।
- सुलह और भरण-पोषण: एक प्रकरण में दोनों पक्षों ने साथ रहने की सहमति दी। पति ने मारपीट न करने और पत्नी को प्रतिमाह ₹5,000 खर्च देने का वचन दिया, जिसके बाद प्रकरण को निगरानी में रखा गया है।
- अनावेदक की अनुपस्थिति पर सख्त रुख: 3 प्रकरणों में अनावेदकों के उपस्थित न होने पर आयोग ने संबंधित थाना प्रभारी (TI) के माध्यम से आगामी पेशी में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
इस जनसुनवाई के दौरान रायपुर संभाग प्रभारी श्रीमती मंजू थदानी, महिला थाना प्रभारी मौर्य, डीएसपी स्नेहा आकाश राव, वन स्टॉप सेंटर काउंसलर नीति सिंह और प्रोटेक्शन ऑफिसर प्रीति पाण्डेय सहित आयोग कार्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।












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