हाल ही में दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) और संसद मार्ग इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बरता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे पीड़ित छात्रों, कंटेंट क्रिएटर्स और छात्राओं ने पुलिस हिरासत के दौरान हुए अमानवीय व्यवहार, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की रूह कंपा देने वाली दास्तां सुनाई।
इस दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “देश की आवाज को लाठी और मुकदमों के दम पर दबाया नहीं जा सकता।”
1. “बोलो दिल्ली पुलिस तुम्हारे पापा हैं” — छात्र समर्थ और धर्मेंद्र की आपबीती
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले छात्र समर्थ और धर्मेंद्र ने पुलिस हिरासत में हुई बर्बरता का खुलासा किया:
- रास्ते भर पिटाई: समर्थ ने आरोप लगाया कि संसद मार्ग थाने से दिल्ली कैंट ले जाते समय पुलिसकर्मियों (विशेषकर कांस्टेबल अंकित कसाना) ने चलती गाड़ी में लगातार लात-घूंसे बरसाए।
- अमानवीय व्यवहार: छात्र को उल्टी आने पर पुलिसकर्मी ने सड़क पर रोकने के बजाय कहा— “बैग खोलो और उसी में उल्टी करो।”
- मानसिक प्रताड़ना: छात्रों का आरोप है कि पुलिसकर्मी गालियां देते हुए बोल रहे थे— “बोलो दिल्ली पुलिस तुम्हारी पापा है, ₹500 पर आते हो, अब बुलाओ अपने नेता राहुल गांधी को।”
- व्हीलचेयर पर कोर्ट पेशी: धर्मेंद्र ने बताया कि बेरहमी से पिटाई के बाद वे बेहोश हो गए थे और उन्हें व्हीलचेयर पर कोर्ट ले जाया गया, जहाँ पुलिस ने झूठी धाराओं में केस दर्ज कर दिया।
2. महिला प्रदर्शनकारी पर क्रूरता: “कान से इयररिंग धंसी, सुनने की शक्ति खोई”
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने दिल्ली पुलिस की महिला और पुरुष कर्मियों द्वारा किए गए कथित हमलों के गंभीर आरोप लगाए:
- नाखूनों से नोंचा और बाल खींचे: एक छात्रा ने आरोप लगाया कि महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उनका गला दबाकर बस में पटका और चेहरे को नाखूनों से नोंचा।
- डॉक्टर ने निकाली कान की बाली: छात्रा के अनुसार, कान पर जूते और पैरों से मारा गया, जिससे कान की बाली अंदर धंस गई और कान नीला पड़ गया।
- कमरा नंबर 107 और बेसमेंट में टॉर्चर: आरोप है कि थाने के कमरा नंबर 107 और बेसमेंट में ले जाकर 7-8 पुलिसकर्मियों ने डंडों और घूंसों से पीटा।
- डीयू छात्रा अतीरा का दर्द: केरल की छात्रा अतीरा ने रोते हुए बताया कि कनॉट प्लेस थाने के बेसमेंट में, जहां कोई CCTV कैमरा नहीं था, उनके पेट और संवेदनशील अंगों (प्राइवेट पार्ट्स) पर लातें मारी गईं। गंभीर चोट के चलते एक छात्रा के कान से सुनाई देना तक बंद हो गया।
3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी और फोन डेटा डिलीट करने का आरोप
कंटेंट क्रिएटर रमित ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से कवरेज और प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइंस के बावजूद उन्हें गैरकानूनी तरीके से डिटेन किया गया।
- फोन फॉर्मेट और गायब: रमित और अन्य छात्रों ने बताया कि पुलिस ने दर्जनों छात्रों के मोबाइल फोन जबरन छीने, पासवर्ड मांगकर गैलरी चेक की और फोन फॉर्मेट करके लौटाए, जबकि कई छात्रों के फोन अब तक वापस नहीं मिले।
- गुंडों की शिकायत पर कार्रवाई: रमित ने दावा किया कि हाथ में लाठी-डंडे लिए कुछ उपद्रवी छात्रों को धमका रहे थे, लेकिन पुलिस ने उपद्रवियों पर कार्रवाई करने के बजाय निर्दोष छात्रों को हिरासत में ले लिया।
4. LIC के पास ‘मेकशिफ्ट डिटेंशन सेंटर’ और नाबालिगों पर जुल्म (अर्जुन का बयान)
केरल के छात्र अर्जुन ने दिल्ली पुलिस के काम करने के तरीके की तुलना ‘नाज़ी काल’ से करते हुए कई बड़े खुलासे किए:
- सीक्रेट डिटेंशन एरिया: कनॉट प्लेस के एलआईसी (LIC) भवन के पास एक गुप्त डिटेंशन सेंटर बनाया गया था, जहां मीडिया और आम जनता की कोई पहुंच नहीं थी।
- Good Cop – Bad Cop रणनीति: पहले अधिकारियों ने सुरक्षित घर भेजने का भरोसा दिया, फिर जेल वैन में कमांडोज द्वारा छात्रों को बुरी तरह पिटवाया गया।
- 16-17 साल के नाबालिग भी शिकार: अर्जुन ने बताया कि बस में कई ऐसे नाबालिग (माइनर्स) और राहगीर थे जो प्रदर्शन का हिस्सा भी नहीं थे। उन्हें शहर से 40 किलोमीटर दूर पंडवाला खुर्द ले जाकर रात में बिना फोन और पैसे के छोड़ दिया गया।
5. राहुल गांधी की चेतावनी: “अमित शाह जी, यह हिंदुस्तान है, एक-एक जुल्म का हिसाब होगा”
पीड़ित छात्रों की दास्तां सुनने के बाद राहुल गांधी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कड़ा रुख अपनाया:
- “यह हिंदुस्तान की आवाज है”: राहुल गांधी ने कहा— “अमित शाह जी और प्रधानमंत्री जी देख लीजिए, यहां कोई हिंदू नहीं, कोई मुस्लिम नहीं, कोई जात-पात नहीं है। यह सिर्फ एक आवाज है—हिंदुस्तान की आवाज, और इसके सामने कोई नहीं टिक सकता।”
- छात्रों से सबूत जुटाने की अपील: राहुल गांधी ने सभी प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा कि वे पुलिस की हर अवैध कार्रवाई का वीडियो रिकॉर्ड रखें और सबूत संभाल कर रखें।
- कार्रवाई का भरोसा: राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा कि वक्त आने पर ऊपर से लेकर नीचे तक, हर दोषी अधिकारी और कांस्टेबल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतंत्र में नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली, मानवाधिकारों और हिरासत में होने वाली हिंसा (Custodial Violence) पर कई तीखे सवाल खड़े करते हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले में स्वतंत्र जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।




