जल जीवन मिशन पर सदन में तीखी बहस: विधायक संगीता सिन्हा ने 111 गांवों में पानी आपूर्ति के दावे पर उठाए सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज जल जीवन मिशन को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक संगीता सिन्हा ने अपने क्षेत्र में नल-जल योजना की जमीनी हकीकत को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे।
विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि उनके क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत 214 योजनाएं स्वीकृत हैं, जिनमें से 102 योजनाएं पूर्ण बताई गई हैं और 111 गांवों में पानी आपूर्ति का दावा किया जा रहा है। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
उन्होंने सदन में कहा कि कई गांवों में पानी की टंकियां लीकेज हैं, पाइपलाइन टूटी हुई हैं, नल कनेक्शन अधूरे हैं और कई जगह नियमित पानी नहीं पहुंच रहा। उन्होंने डांडेसरा, करियाटोला, दानीटोला, बिच्छी बहारा, मुजगहन, बासीन, दुपचेरा, जेमरतला, दरबारी, नवागांव, सोपुर और लिमोरा जैसे गांवों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की टंकियों से पानी टपक रहा है और गुणवत्ता पर सवाल हैं।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि 99 योजनाएं अभी भी अपूर्ण हैं और विभाग द्वारा एक समान जवाब दिया जा रहा है कि “कार्य गति से किया जा रहा है”। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार 85 प्रतिशत कार्य पूरा कर चुके हैं, लेकिन भुगतान पूरा नहीं मिलने के कारण काम रुका हुआ है।
इस पर मंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान में 111 गांवों में पेयजल आपूर्ति हो रही है। यदि किसी गांव में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है तो उसकी जानकारी दी जाए, परीक्षण कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में धीमी गति से कार्य होने की 22 शिकायतें और गुणवत्ताहीन निर्माण की 8 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जहां-जहां टंकी खराब या लीकेज पाई गई, वहां सुधार या पुनर्निर्माण की कार्रवाई की गई है, जैसे रानी तराई गांव में टंकी को डिस्मेंटल कर नई टंकी बनाने का निर्णय लिया गया।
मंत्री अरुण साव ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की अवधि 2028 तक बढ़ा दी है और राज्य सरकार सभी योजनाओं को निर्धारित समय से पहले पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विधायक संगीता सिन्हा ने स्पष्ट समय-सीमा की मांग करते हुए कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में अधूरे कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और गुणवत्ताहीन निर्माण पर ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि 111 गांवों में पानी आपूर्ति के दावे और जमीनी सच्चाई के बीच अंतर क्यों दिख रहा है? और 99 अपूर्ण योजनाएं कब तक पूरी होंगी?
सरकार ने शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि संजारी बालोद क्षेत्र में जल जीवन मिशन की योजनाएं कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ जमीन पर उतरती हैं।


