छत्तीसगढ़ में विकास की नई इबारत, नीति से जमीन तक दिखा असर

रायपुर। छत्तीसगढ़ अब सिर्फ योजनाओं की घोषणा करने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि उन योजनाओं को जमीन पर उतारकर बदलाव की मिसाल पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाते हुए एक ऐसी विकासधारा तैयार की है, जिसमें सम्मान, सुरक्षा और अवसर—तीनों को बराबर महत्व दिया गया है।
इस पूरी परिवर्तन यात्रा में उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की भूमिका बेहद अहम रही है। उनका काम केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचकर उनके जीवन में ठोस बदलाव लाने का प्रयास है।
श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की पहल इस बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरी है। अब श्रमिक परिवारों के बच्चे भी बड़े और प्रतिष्ठित स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे उनके भविष्य की नई दिशा तय हो रही है। वहीं मेधावी छात्रों को आर्थिक प्रोत्साहन देकर सरकार ने यह साफ कर दिया है कि प्रतिभा को हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा।
आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार ने भरोसे की नई मिसाल कायम की है। पिछले दो वर्षों में करोड़ों रुपये सीधे श्रमिकों के खातों में ट्रांसफर किए गए, जिससे पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। ‘श्रम अन्न योजना’ जैसी पहल, जिसमें सिर्फ 5 रुपये में भरपेट और पौष्टिक भोजन मिलता है, सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाती है।
औद्योगिक विकास की बात करें तो छत्तीसगढ़ तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है। नई औद्योगिक नीति (2024-30) के तहत निवेश को बढ़ावा मिला है, जिससे नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं और युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। नवा रायपुर में प्रस्तावित एआई डाटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आईटी सेक्टर में निवेश राज्य को तकनीकी रूप से मजबूत बना रहे हैं।
सिर्फ आर्थिक ही नहीं, सामाजिक समावेशन भी इस विकास मॉडल का अहम हिस्सा है। महिला उद्यमियों को बढ़ावा, कामकाजी महिलाओं के लिए सुविधाएं और दूरस्थ क्षेत्रों तक उद्योगों का विस्तार—ये सभी कदम इस बात के संकेत हैं कि विकास अब सीमित नहीं, बल्कि समावेशी हो चुका है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ आज उस दिशा में बढ़ रहा है जहां विकास केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में दिखाई दे रहा है—और यही इस नेतृत्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है।




