आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक: छोटे से लोन ने बदल दी गायत्री गुप्ता की जिंदगी

रायपुर। एमसीबी जिले के भरतपुर विकासखंड अंतर्गत तिलौली ग्राम पंचायत की गायत्री गुप्ता आज ग्रामीण महिला आत्मनिर्भरता की मजबूत पहचान बन चुकी हैं। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक संकट से जूझने वाली गायत्री ने कठिन हालात के आगे झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना और अपने परिवार की दिशा ही बदल दी।
घर की जिम्मेदारियों के बीच सपनों को साकार करना उनके लिए आसान नहीं था। लगातार आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और “शेरावाली महिला स्व सहायता समूह” से जुड़कर बदलाव की शुरुआत की। यहीं से उनके जीवन में आत्मविश्वास और उम्मीद की नई किरण जगी।
समूह के माध्यम से उन्हें 70 हजार रुपये का ऋण मिला, जिसने उनके सपनों को उड़ान दी। इस राशि से उन्होंने अपने गांव में कपड़ों की छोटी दुकान शुरू की। शुरुआती दौर चुनौतीपूर्ण रहा — ग्राहकों की कमी, सीमित अनुभव और बाजार की समझ का अभाव। लेकिन उन्होंने धैर्य और मेहनत के दम पर धीरे-धीरे अपनी पहचान बना ली।
आज उनकी दुकान गांव ही नहीं, आसपास के इलाकों में भी भरोसेमंद केंद्र बन चुकी है। इस व्यवसाय से उन्हें हर साल लगभग 87 हजार रुपये की आय हो रही है, जिससे परिवार की जरूरतें सम्मान के साथ पूरी हो रही हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और भविष्य की बचत — सब कुछ अब बेहतर ढंग से संभव हो पा रहा है।
आर्थिक मजबूती के साथ गायत्री के आत्मविश्वास में भी बड़ा बदलाव आया है। जो महिला कभी खुद को असहाय महसूस करती थी, वही आज अपने फैसले खुद लेने वाली और दूसरों के लिए प्रेरणा बनने वाली उद्यमी बन चुकी है।
उनका कहना है कि स्व सहायता समूह ने उन्हें सिर्फ आर्थिक सहारा नहीं दिया, बल्कि जीवन को नए नजरिए से देखने की ताकत भी दी। समूह की बैठकों और प्रशिक्षण ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे भी कुछ बड़ा कर सकती हैं। आज गांव की कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ा रही हैं।
गायत्री गुप्ता की सफलता यह साबित करती है कि मजबूत इरादों और सही अवसर के साथ सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धि में बदल सकते हैं। यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है।




