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मध्य पूर्व की आग में अमेरिका का बड़ा दांव: इजरायल को 6.67 अरब डॉलर का हथियार पैकेज, ईरान पर बढ़ा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने मध्य पूर्व को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। इसी तनावपूर्ण माहौल में ट्रंप प्रशासन ने इजरायल के लिए अरबों डॉलर के विशाल हथियार सौदे को हरी झंडी दे दी है। यह कदम न सिर्फ इजरायल के प्रति अमेरिका की मजबूत प्रतिबद्धता दिखाता है, बल्कि ईरान को भी कड़ा संदेश देता है कि वॉशिंगटन पीछे हटने के मूड में नहीं है।

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, 6.67 अरब डॉलर का यह रक्षा पैकेज इजरायल की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देगा। सौदे का सबसे अहम हिस्सा 30 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर हैं, जिनके साथ आधुनिक हथियार, रॉकेट सिस्टम और अत्याधुनिक टार्गेटिंग टेक्नोलॉजी शामिल है। करीब 3.8 अरब डॉलर की लागत वाले ये हेलीकॉप्टर खास तौर पर युद्ध अभियानों के लिए तैयार किए गए हैं, जिससे इजरायल की वायु शक्ति और मारक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

इसके अलावा, अमेरिका 3,250 हल्के सामरिक वाहन भी इजरायल को देगा, जिनकी कीमत लगभग 1.98 अरब डॉलर है। ये वाहन सैनिकों, हथियारों और जरूरी रसद की तेज आवाजाही में अहम भूमिका निभाएंगे, खासकर लंबे और जटिल सैन्य अभियानों के दौरान।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस डील का मकसद इजरायल की आत्मरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। हालांकि, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव लगातार बढ़ा रहा है। ट्रंप ने साफ किया है कि ईरान को परमाणु समझौते पर अमेरिका का संदेश स्पष्ट है और अब समय तेजी से निकल रहा है।

ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिकी युद्धपोत, जिनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत शामिल हैं, लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के साथ क्षेत्र में तैनात हैं। दूसरी ओर, ईरान ने बातचीत के संकेत दिए हैं, लेकिन बराबरी और निष्पक्षता की शर्त के साथ। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, फिलहाल किसी आधिकारिक वार्ता की तारीख तय नहीं है।

इसके बावजूद अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान की मंशा को लेकर आशंकित हैं। 2015 के परमाणु समझौते के बाद उल्लंघनों और निरीक्षकों से सहयोग में कमी के आरोप, साथ ही जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों ने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और गहरा कर दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी, तो सैन्य विकल्प भी मेज पर रहेंगे।

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