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अमेरिका की नई सुरक्षा रणनीति: पुतिन की भारत यात्रा के बाद वॉशिंगटन का बदला गेमप्लान

वैश्विक भू-राजनीति में हलचल का सबसे बड़ा असर अब अमेरिका तक पहुँच चुका है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अपनी नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी जारी कर दी है—एक ऐसा दस्तावेज़ जो अमेरिका की आने वाली कूटनीतिक चालों का ब्लूप्रिंट बताता है।

33 पन्नों की इस रिपोर्ट में व्हाइट हाउस ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में अमेरिका की विदेश नीति की धुरी होगी—‘अमेरिका फर्स्ट’। यानी, हर संबंध, हर साझेदारी और हर वैश्विक कदम का मकसद होगा अमेरिकी हितों की रक्षा और पश्चिमी गोलार्ध में अपना प्रभुत्व मजबूत करना।

यूरोप को कड़ी चेतावनी

दस्तावेज़ में यूरोपीय देशों की प्रवासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संबंधी नीतियों को उनकी ‘सभ्यता के विनाश’ की ओर बढ़ता खतरा बताया गया है। अमेरिका ने पहली बार यूरोपीय सहयोगियों की दीर्घकालिक विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा दिए, जिससे ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में खटास बढ़ने की आशंका है।

भारत—इंडो-पैसिफिक में अमेरिका का भरोसेमंद पार्टनर

नई रणनीति में भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार करार दिया गया है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि:

अमेरिका–भारत संबंधों को रणनीतिक, वाणिज्यिक और टेक्नोलॉजी के स्तर पर और अधिक मजबूत किया जाएगा।

भारत को क्वाड में बड़ी भूमिका के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

चीन की दबावभरी रणनीतियों का मुकाबला भारत के सहयोग से आसान होगा।

चीन—सबसे बड़ा आर्थिक और सामरिक प्रतिद्वंद्वी

रिपोर्ट में चीन को अमेरिका की सबसे बड़ी चुनौती बताया गया है—चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, तकनीक हो या सैन्य क्षमता। दस्तावेज़ साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में अमेरिकी रणनीतिक फोकस का केंद्र चीन को रोकना होगा।

भारत–अमेरिका टेक और रक्षा साझेदारी पर फोकस

AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम में भारत को ‘विश्वसनीय टेक पार्टनर’ बताया गया है। अमेरिका मानता है कि भारत के साथ तकनीकी जुड़ाव भविष्य के शक्ति-संतुलन में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

रूस—संघर्ष से दूरी की नई नीति

ट्रंप प्रशासन ने रूस के साथ लंबे समय तक जारी टकराव को ‘गलती’ माना है और संकेत दिया कि अब वे रूस के साथ रणनीतिक तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
पुतिन की हालिया भारत यात्रा और भारत–रूस की बढ़ती नजदीकियों ने वॉशिंगटन में चिंता बढ़ाई है, इसलिए अमेरिका रूस नहीं, बल्कि चीन को मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानते हुए नई समीकरण गढ़ रहा है।

इंडो-पैसिफिक—अगली सदी का युद्धक्षेत्र

दस्तावेज़ के अनुसार यह क्षेत्र दुनिया की आधी GDP का स्रोत है और भविष्य का आर्थिक–भूराजनीतिक केंद्र बनेगा।
अमेरिका चाहता है कि लोकतांत्रिक देश मिलकर चीन की ‘शोषणकारी आर्थिक रणनीति’ को चुनौती दें।

क्वाड में भारत की निर्णायक भूमिका

अमेरिका ने क्वाड को ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ का आधार बताया है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा में भारत को मुख्य भूमिका का दावेदार माना है।

‘अमेरिका फर्स्ट’—अब बिना किसी राजनीतिक शर्त के

नई रणनीति में साफ लिखा है कि अमेरिका अब किसी साझेदार देश पर लोकतांत्रिक सुधारों का दबाव नहीं डालेगा। अब रिश्ते पूरी तरह हित आधारित होंगे—जहाँ भारत एक प्राकृतिक, भरोसेमंद और संतुलित पार्टनर है।

अंत में, राष्ट्रपति ट्रंप ने रणनीति को अमेरिका को “सबसे महान और सफल राष्ट्र” बनाए रखने का संकल्प बताया है। यह दस्तावेज़ स्पष्ट करता है कि वॉशिंगटन अब अपने रिश्तों, साझेदारियों और प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है—जहाँ चीन चुनौती है, रूस जोखिम नहीं, और भारत अवसर।

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