छत्तीसगढ़ न्यूज़ | Fourth Eye News

छत्तीसगढ़ में भारत बंद का असर, हड़ताल के बाद कोयला खदानें बंद, सरकार और यूनियनों में टकराव

भारत बंद का असर छत्तीसगढ़ में स्पष्ट रूप से दिखा, जहां कोल इंडिया की कई खदानें बंद रहीं और कई व्यापारिक गतिविधियों में रुकावट आई। 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों ने नई श्रम संहिताओं के विरोध में हड़ताल का आह्वान किया, जिसमें मजदूरों के ‘हक और सोशल सिक्योरिटी’ को कमजोर करने का आरोप लगाया गया। इस हड़ताल का असर रायपुर और खदानों से लेकर बरौद, जामपाली, बेजारी आदि क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां कई कामगार और कर्मचारी शामिल हुए।

हड़ताल का समर्थन करते हुए श्रमिकों ने रायपुर में मशाल रैली निकाली और कहा कि कानून श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने श्रमिक सुरक्षा और नौकरी सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं किया, तो भविष्य में और बड़े आंदोलनों को देखा जाएगा। इस दौरान कोयला खदानों के बंद होने से परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे कई बेरोज़गार युवा चिंतित दिखे।

सरकार का दावा है कि यह बंद “नागरिकों के आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है” और इसे राजनीतिक प्रेरणा का हिस्सा बताया गया है। व्यापार समूहों ने भी इस हड़ताल की आलोचना की है, यह कहते हुए कि रोजगार सृजन और निवेश को हानि पहुँच सकती है। यूनियनों और सरकार के बीच यह विवाद छत्तीसगढ़ के श्रम-समर्थक वातावरण पर बड़े बहस का विषय बन गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button