समूह से जुड़कर बदली तकदीर: चर्रा की योगेश्वरी बनीं सफल मुर्गी उद्यमी, अब दूसरों को भी बना रहीं आत्मनिर्भर

रायपुर। दीनदयाल अन्त्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को रोजगार, प्रशिक्षण, ऋण और बाजार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसी पहल ने धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम चर्रा की योगेश्वरी देवांगन की जिंदगी बदल दी।
समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार खेती और मजदूरी पर निर्भर था, जिससे घर की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता था। लेकिन समूह में शामिल होने के बाद उन्होंने बैंक से ऋण लिया और पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र तथा आर-सेटी से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने गांव में देशी मुर्गी फार्म शुरू किया।
शुरुआत में सामाजिक दबाव और बाजार की जानकारी की कमी जैसी कई चुनौतियाँ सामने आईं, लेकिन हौसले और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ाया। आज उनका फार्म सफल व्यवसाय बन चुका है। यहां सात से अधिक मुर्गी नस्लों के साथ बटेर, बत्तख, गिनी फाउल और टर्की भी पाले जा रहे हैं। अंडों से चूजे निकालने की मशीन भी स्थापित है, जिससे उत्पादन बढ़ा है।
बाजार तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया और “देवांगन देशी मुर्गी फार्म चर्रा कुरूद” नाम से यूट्यूब चैनल भी शुरू किया, जहां वे अपने अनुभव साझा कर अन्य महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती हैं।
अब उनका लक्ष्य है कि समूह की ज्यादा से ज्यादा महिलाएं भी आय बढ़ाने वाले कार्यों से जुड़ें। इसके लिए वे प्रशिक्षण देकर उन्हें मुर्गीपालन से जोड़ रही हैं और भविष्य में खरगोश पालन शुरू करने की भी योजना बना रही हैं।
यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं न केवल खुद का जीवन बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।




