दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की गूंज उठने से पहले ही पुलिस प्रशासन ने अपनी दमनकारी नीति का खुला प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए विमान से दिल्ली पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके और अन्य प्रमुख नेताओं को एयरपोर्ट पर उतरते ही पुलिस ने बलपूर्वक हिरासत में ले लिया है। सरकार के इस कायराना行动 ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वर्तमान व्यवस्था वैचारिक विरोध और असहमति के स्वरों से कितनी बुरी तरह खौफ खाई हुई है।
गिरफ्तारी से ठीक पहले जारी अपने वीडियो संदेश में अभिजीत डिपके ने दो टूक कहा था कि अगर उन्हें या उनके साथियों को गिरफ्तार भी कर लिया जाता है, तब भी यह आंदोलन रुकना नहीं चाहिए। इसके बावजूद पुलिस ने कानून के नाम पर तानाशाही का परिचय देते हुए सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंट दिया है।
विपक्ष और युवा नेतृत्व को इस प्रकार जबरन सलाखों के पीछे धकेलने की यह नीति इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सरकार तानाशाही के रास्ते पर चलकर अपनी असफलताओं को छुपाना चाहती है, जिसका खामियाजा उसे आने वाले वक्त में भुगतना होगा।
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