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दिल्ली में इमरजेंसी जैसे हालात: जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से पहले प्रशासन ने फूंके लोकतंत्र के सारे नियम, पुलिस छावनी में तब्दील हुई राष्ट्रीय राजधानी

राजधानी दिल्ली आज पूरी तरह एक सैन्य छावनी और छावनी में तब्दील हो चुकी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए सत्ताधारी सरकार ने अलोकतांत्रिक तानाशाही की सभी हदें पार कर दी हैं। विरोध की आवाज़ को दबाने के लिए दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति सिरे से खारिज कर दी और शहर के चप्पे-चप्पे पर भारी सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है। हालात यह हैं कि सड़कों पर पहरा बैठा दिया गया है और संभावित प्रदर्शनकारियों को घरों से निकलने तक नहीं दिया जा रहा है।

चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुखर हुए युवा और विपक्षी नेताओं की आवाज़ को खामोश करने के लिए सरकार ने आपातकाल जैसे प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया गया है, ताकि सच्चाई की कोई भी चिंगारी बाहर न आ सके। सत्ता की इस बौखलाहट से साफ है कि सरकार युवाओं के आक्रोश और लोकतांत्रिक विरोध के ज्वार से बुरी तरह डर चुकी है।

जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन कर रही यह सरकार और प्रशासनिक तंत्र यह भूल चुका है कि दमन की इन जंजीरों से आवाज़ों को दबाया नहीं जा सकता, बल्कि यह आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक भूकम्प का संकेत बन चुका है।

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