Europe engulfed in flames and a sweltering China: Amidst nature's fury, unexploded bombs from World Wars I and II are beginning to detonate!

आग की लपटों में घिरा यूरोप और उबलता हुआ चीन: कुदरत के कहर के बीच फटने लगे प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के जिंदा बम!

प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वाले विकसित देशों को अब कुदरत तड़पा-तड़पा कर सजा दे रही है। एक तरफ जहां पूरा यूरोप रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और भयानक दावानल (Wildfires) की आग में सुलग रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस भीषण गर्मी ने एक खौफनाक और जानलेवा खतरे को जमीन से बाहर निकाल दिया है। जानकारी के मुताबिक, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी और नीदरलैंड के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण जमीन के नीचे दबे प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के हजारों जिंदा बम और बारूदी सुरंगें अपने आप फटने लगी हैं। दमकलकर्मी आग बुझाने जाएं तो जाएं कैसे, क्योंकि वहां कदम-कदम पर मौत का विस्फोट हो रहा है।

दूसरी तरफ, चीन का घमंड भी मूसलाधार बारिश और चक्रवाती तूफान ‘नारा’ (Typhoon Narra) ने पूरी तरह से तोड़ दिया है। यूएस न्यूज के अनुसार, इस भयंकर तूफान के कारण चीन को अपने दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों से लाखों लोगों को आनन-फानन में सुरक्षित निकालना पड़ा है और बाढ़ के गंदे पानी में पूरा का पूरा शहर डूब चुका है। यहां तक कि चीन को अपना बहुप्रतीक्षित चांग’ई-7 (Chang’e-7) चंद्र मिशन भी शर्मिंदगी के साथ टालना पड़ा है।

प्रकृति के विनाशकारी तांडव की तस्वीरें:

यूरोप में युद्ध का भूत: बेल्जियम और फ्रांस के पुराने युद्धक्षेत्रों में लगी आग के कारण हर साल सैकड़ों टन पुराने हथियारों के फटने का खतरा बढ़ गया है, जिससे वहां आपातकाल जैसे हालात हैं।

सूखती नदियां और बारूद: भयंकर सूखे के कारण यूरोप की नदियां और झीलें रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे पानी के नीचे छिपे सदियों पुराने खतरनाक हथियार इंसानों के सामने आ गए हैं।

चीन का स्पेस प्रोग्राम ध्वस्त: चक्रवाती तूफान नारा के कारण मचे त्राहि-त्राहि के बीच बीजिंग को अपने मून मिशन को बीच में ही रोकना पड़ा है, जिससे उसकी भारी किरकिरी हुई है।

लाखों लोग बेघर: चीन के गुआंग्शी और हैनान प्रांतों में घुटनों तक भरे बाढ़ के पानी और मलबे ने लाखों लोगों की जिंदगी को नरक बना दिया है।

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4rtheye web Desk
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