फ्लॉप बल्लेबाजी, लचर कप्तानी और चोट का ड्रामा: श्रीलंका दौरे से पहले ही बेनकाब हुआ टीम इंडिया का खोखलापन!

भारतीय क्रिकेट टीम का अहंकार और बोर्ड का कुप्रबंधन एक बार फिर सड़कों पर आ गया है। श्रीलंका दौरे की शुरुआत से पहले जिस तरह के शर्मनाक हालात भारतीय खेमे में दिख रहे हैं, उसने हर भारतीय प्रशंसक का खून खौला दिया है। गॉल टेस्ट से महज कुछ दिन पहले अभ्यास मैचों के ढोंग, नेट्स में कप्तान शुभमन गिल की बचकानी इंजरी और जसप्रीत बुमराह जैसे मुख्य तेज गेंदबाज का इंजरी मैनेजमेंट के नाम पर बार-बार बाहर होना यह साबित करता है कि हमारी टीम पेशेवर खेल खेलने नहीं, बल्कि केवल विज्ञापन शूटिंग करने में व्यस्त है।
पिछले कुछ अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और घरेलू मैदानों पर भारतीय टीम के हालिया फ्लॉप प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि बड़े-बड़े वादों और सोशल मीडिया रील्स के पीछे सिर्फ खोखलापन छिपा है। जब-जब मुश्किल पिचें या विरोधी टीम का तीखा आक्रमण सामने आता है, हमारे तथाकथित ‘स्टार’ बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। श्रीलंका में अभ्यास मैच के लिए चार दिन का शेड्यूल तय था, लेकिन श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने भारतीय टीम की तैयारियों की पोल खोलते हुए इसे घटाकर तीन दिन कर दिया। क्या यही हमारी विश्वस्तरीय तैयारी है? अभ्यास मैच की पिचों को लेकर भी टीम प्रबंधन रोना रो रहा है—इन्हें टर्निंग ट्रैक चाहिए, लेकिन घास वाली पिच मिलते ही इनके पसीने छूटने लगते हैं।
टीम चयन में पक्षपात, खराब शॉट सेलेक्शन और फिटनेस के नाम पर किया जा रहा नौटंकी अब बर्दाश्त से बाहर है। जसप्रीत बुमराह को एक के बाद एक सीरीज से आराम देकर या चोटिल बताकर बाहर बैठाया जा रहा है, वहीं बीसीसीआई का नया फिटनेस मॉडल कागजों तक सीमित दिखता है। मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी गेंदबाजों को किनारे कर अनुभवहीन और अनफिट खिलाड़ियों के भरोसे मैदान पर उतरना किसी आत्मघाती कदम से कम नहीं है। कप्तान शुभमन गिल नेट्स में एक साधारण थ्रो-डाउन गेंद पर अंगूठा तुड़वा बैठते हैं—यह साफ दर्शाता है कि खिलाड़ियों का ध्यान खेल की बुनियादी तकनीकों पर नहीं बल्कि चकाचौंध पर है। अगर भारतीय टीम ने अपनी इस शर्मनाक और लापरवाह मानसिकता को तुरंत नहीं बदला, तो आने वाली टेस्ट सीरीज में श्रीलंका की सरजमीं पर भारत का इतिहास की सबसे अपमानजनक पराजयों में से एक से सामना होना तय है।




