गुजरात के कच्छ जिले में प्रशासन द्वारा एक मस्जिद को हटाने के लिए दिए गए 3-4 दिनों के नोटिस ने राज्य का सियासी और सामाजिक पारा गर्मा दिया है। जल्दबाजी में दिए गए इस डेमोलिशन नोटिस के खिलाफ तुरंत गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया, जिस पर कड़ी सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कच्छ कलेक्टर से मामले पर तुरंत जवाब तलब किया है।
अवैध निर्माण के नाम पर अचानक दी गई इस कार्रवाई की चेतावनी के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया है। एक तरफ जहां स्थानीय लोगों और मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित मौका तक नहीं दिया गया और जानबूझकर एकतरफा कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन इसे नियमित बेदखली प्रक्रिया बता रहा है।
अदालत के इस हस्तक्षेप ने फिलहाल बुलडोजर की रफ्तार पर रोक तो लगा दी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पूरे राज्य में सांप्रदायिक और राजनीतिक बहस छिड़ गई है। सवाल यह है कि प्रशासनिक नियमों की आड़ में क्या किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है?
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