छत्तीसगढ़

मिर्ची की खेती कर पहाड़ी कोरवा महिलाएं संवार रही हैं अपना जीवन

जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा महिला स्व-सहायता समूह बनाकर उनके आर्थिक स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से गौठानो में मल्टीएक्टिविटी के माध्यम से महिलाओं को रोजगार दिया जा रहा है, जिसके तहत शंकरगढ विकासखण्ड के ग्राम जगिमा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन(बिहान) की कृष्णा महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने मिर्ची का उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
राज्य शासन की महत्वपूर्ण योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी के तहत् विकासखण्ड शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत जगीमा में आवर्ती चराई गौठान का चयन किया गया है, जिसके तहत् गांव में निवास करने वाले पहाड़ी कोरवा परिवार जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान द्वारा गठित स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत जगीमा की कृष्णा महिला स्व-सहायता समूह के कुल 10 सदस्यों में से 7 सदस्यों द्वारा आवर्ती चराई गौठान के निकट लगभग 1 एकड़ सामुदायिक बाड़ी विकास के तहत् बिहान एवं उद्यानिकी विभाग शंकरगढ़ के सहयोग से 7 पहाड़ी कोरवा समूह के सदस्यों द्वारा लाईन विधि से मिर्ची की खेती की गई है। मिर्ची खेती की समस्त तकनीकी जानकारी, खेत तैयार करना, लाईन से लाईन एवं पौधों से पौधों की दूरी, तकनीकी जानकारी, समय-समय पर खरपतवार निकालना, रोगों की पहचान करना एवं समय पर जैविक पद्धति से उपचार करना है। बिहान एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा मिर्च की तोड़ाई कर उसे मंडी एवं स्थानीय बाजार तक पहुंचाने तथा उचित दर दिलाने सहयोग किया जा रहा है। अब तक समूह के सदस्यों द्वारा चार चरणों में मिर्ची की तोड़ाई की गई है, जिसमें प्रथम चरण में 90 किलो, द्वितीय चरण में 180 किलो, तृतीय चरण में 150 किलो, चौथे चरण में 180 किलो मिर्ची की तोड़ाई की गई है। इस प्रकार चार चरणों में कुल 600 किलो मिर्च उत्पादित कर औसत 30 रूपये प्रति किलो की दर से मंडी एवं बाजार में बेचा गया है। यह फसल आगामी 2 माह तक समूह को लाभ दिलायेगा।
मिर्ची खेती में कुल 4 हजार रूपये की लागत लगाकर 14 हजार रूपये का शुद्ध लाभ अब तक समूह के सदस्यों को प्राप्त हुआ है। मिर्ची खेती कर सभी सदस्यों में अत्यधिक प्रसन्नता हुई है, इनके द्वारा भविष्य में सरसों, रागी एवं अन्य साग सब्जियों की खेती कर अतिरिक्त आय प्राप्त करने की योजना है।

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