कोरबा के खेतों में उम्मीदें लहराईं, सरकार की योजनाओं से संतोष जैसे किसान आत्मनिर्भर

कोरबा। खरीफ की शुरुआत होते ही खेतों में हल चलने लगे हैं, और किसानों के चेहरों पर उम्मीदों की चमक लौट आई है। राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों और सहकारी समितियों की तत्परता ने किसानों की राह आसान कर दी है।
कोरकोमा गांव के सीमांत किसान संतोष केशरवानी का कहना है कि इस बार खेती की शुरुआत बिना किसी परेशानी के हुई। समय पर खाद, बीज और अन्य आवश्यक सामग्री मिलने से उन्हें न तो बाजार के चक्कर काटने पड़े और न ही किसी तरह की दिक्कत हुई।
संतोष बताते हैं कि उनके पास लगभग 5 एकड़ खेत है। बारिश भी इस बार समय पर हुई, जिससे बुआई से लेकर पौधों की तैयारी तक सब कुछ सुचारू रूप से हुआ। उन्होंने कोरकोमा सहकारी समिति से 7-7 बोरी डीएपी, यूरिया और सुपर फॉस्फेट बिना किसी झंझट के प्राप्त किया।
पिछले साल उन्होंने 92 क्विंटल धान बेचा था। इस बार भी वे पूरे परिवार के साथ दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। खेतों में फसल की हालत देखकर उनका हौसला और भी बढ़ा है।
वे भावुक होकर कहते हैं,
“खेती अब सिर्फ जीविका नहीं रही, यह अब हमारे सपनों की जमीन बन गई है। सरकार की योजनाओं ने छोटे किसानों को नया आत्मविश्वास दिया है।”
राज्य सरकार द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से समय पर की गई खाद और बीज की उपलब्धता ने न सिर्फ किसानों की लागत घटाई, बल्कि उनके चेहरों पर मुस्कान भी लौटाई है।