गाज़ा प्लान पर इजरायल में उबाल: पाकिस्तानी सैनिकों की एंट्री पर देश के भीतर से उठी रोक की मांग

इजरायल में इन दिनों गाज़ा को लेकर एक नया राजनीतिक और रणनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। देश के रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने अपनी ही सरकार के सामने एक सख़्त मांग रखी है—गाज़ा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स) में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती रोकी जाए।
इन वर्गों का आरोप है कि गाज़ा पीस प्लान के नाम पर एक ऐसी रणनीतिक चूक की जा रही है जिसकी कीमत इजरायल को भारी पड़ सकती है। प्रदर्शनकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर की नीतियों के चलते इजरायल पर अनावश्यक जोखिम थोपा जा रहा है। उनका साफ कहना है कि गाज़ा में पाकिस्तानी सैनिकों की मौजूदगी इजरायली सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
गौरतलब है कि गाज़ा पीस प्लान के तहत एक अंतरराष्ट्रीय बल की तैनाती प्रस्तावित है, जिसमें कई देशों के सैनिक शामिल होंगे। इस बल का उद्देश्य हमास पर नियंत्रण, शांति व्यवस्था कायम रखना और पुनर्निर्माण कार्यों की सुरक्षा करना है। इंडोनेशिया और पाकिस्तान के सैनिकों को इसमें शामिल करने की योजना है। वहीं तुर्की के सैनिकों को इजरायल पहले ही यह कहकर खारिज कर चुका है कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
अब इजरायल के पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह तुर्की को ब्लॉक किया गया, उसी तरह पाकिस्तान को भी रोका जाना चाहिए। इजरायली सुरक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि पाकिस्तानी सैनिक हमास के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करेंगे, बल्कि इससे संगठन को अप्रत्यक्ष मजबूती मिल सकती है। आशंका जताई जा रही है कि इजरायली सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां हमास तक पहुंच सकती हैं।
इजरायल के भीतर यह तर्क भी दिया जा रहा है कि यदि पाकिस्तानी सैनिक गाज़ा में तैनात हुए, तो यह इजरायल की सीमाओं पर एक नए और बड़े खतरे को न्योता देने जैसा होगा। खासतौर पर इस तथ्य को लेकर चिंता जताई जा रही है कि पाकिस्तान एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं, जिससे सुरक्षा जोखिम और बढ़ जाता है।




