दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर सियासी और सुरक्षा बलों की जंग का मैदान बन चुका है! गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद जंतर-मंतर से धरने की मंजूरी छीने जाने के ठीक अगले ही दिन सीजेपी नेताओं आशुतोष रंका और सौरव दास ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया। इस कार्रवाई से सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है।
मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस गिरफ्तारी को केंद्र सरकार की सीधी बुजदिलाना हरकत करार दिया है। उन्होंने खुलेआम हुंकार भरते हुए कहा कि तिरंगा लहराना और अपनी संवैधानिक मांगों के लिए आवाज उठाना कोई गुनाह नहीं है। पुलिस की इस तरह की तानाशाही पर सवाल उठाते हुए अब जनसंघठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है, जिससे राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद नाज़ुक मोड़ पर पहुँच चुकी है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष की इस आर-पार की जंग में पिसती जनता अब यह पूछने पर मजबूर है कि क्या वाकई देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बन चुके हैं या फिर सुरक्षा के नाम पर उठने वाली हर आवाज को पुलिसिया लाठियों और जेल की सलाखों से दबाया जा रहा है?




