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आसमान में ‘मेक इन इंडिया’ की दहाड़: स्वदेशी ताकत से उड़ान भरेगा तेजस मार्क-2

भारतीय रक्षा इतिहास में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। अब लड़ाकू विमानों की ताकत सिर्फ विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रहेगी। देश का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस मार्क-2 आने वाले वर्षों में भारतीय धरती पर बने शक्तिशाली इंजन के साथ आसमान में अपनी पकड़ मजबूत करेगा।

डीआरडीओ और HAL की साझा मेहनत से विकसित तेजस मार्क-2 का स्वदेशी इंजन के साथ पहला उड़ान परीक्षण 2029 में प्रस्तावित है। इस दिशा में भारत और अमेरिकी एयरोस्पेस दिग्गज जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के बीच हुआ F-414 इंजन समझौता मील का पत्थर माना जा रहा है। करीब 1.5 अरब डॉलर के इस सौदे में अमेरिका भारत को 80% तकनीक हस्तांतरण देने पर राजी हुआ है, जिसे मार्च 2026 तक अंतिम रूप मिलने की उम्मीद है।

इस समझौते के बाद HAL भारत में ही F-414 इंजन का निर्माण, असेंबलिंग और परीक्षण करेगा। अगर तय समय पर सब कुछ हुआ, तो 2029 तक देश को पहला स्वदेशी F-414 इंजन मिल सकता है। इसके लिए नई उत्पादन लाइनों और अत्याधुनिक टेस्टिंग सुविधाओं की नींव रखी जाएगी।

तेजस मार्क-2 का पहला प्रोटोटाइप 2026 में उड़ान भरेगा, जबकि 2031 में वायुसेना इसके व्यापक परीक्षण करेगी। हथियार प्रणाली, उड़ान नियंत्रण और युद्धक क्षमताओं की गहन जांच के बाद इसे सेना में शामिल करने की तैयारी होगी। HAL ने 2030-32 के बीच सीमित श्रृंखला के 8 विमान बनाने का प्रस्ताव भी दिया है, ताकि तैनाती की प्रक्रिया तेज हो सके।

यह समझौता केवल तेजस तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के AMCA प्रोजेक्ट के लिए भी भारत की नींव मजबूत करेगा। तकनीक हस्तांतरण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा होगा, जो खुद का आधुनिक जेट इंजन बनाने में सक्षम हैं—यानी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उड़ान अब और ऊंची होगी।

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