ऑनलाइन गेमिंग पर लगाम, लेकिन सोशल गेम्स को मिलेगा बढ़ावा!

देश में तेज़ी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग के चलन को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक’ नाम का नया बिल लोकसभा से पास हो चुका है। इसका मकसद दोहरा है —
खतरनाक मनी गेम्स पर सख्ती
ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को बढ़ावा देना
खिलाड़ी नहीं, सिस्टम पर कसेगा शिकंजा
इस बिल की सबसे दिलचस्प बात ये है कि गेम खेलने वाले यूज़र्स को कोई सजा नहीं दी जाएगी।
बल्कि निशाने पर होंगे:
गेम सर्विस देने वाले
फर्जी विज्ञापन चलाने वाले
प्रमोटर
और ऐसे प्लेटफॉर्म्स को फंड करने वाले लोग
क्या-क्या होगा प्रतिबंधित?
सरकार का फोकस खासतौर पर उन ऑनलाइन मनी गेम्स पर है, जो लोगों को लत, आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव की ओर धकेलते हैं।
बिल कहता है:
ऐसे खेल जो सट्टेबाज़ी या पैसों के लेनदेन पर आधारित हैं, पूरी तरह बैन होंगे
इनके विज्ञापन, संचालन और फंडिंग पर भी रोक होगी
वित्तीय धोखाधड़ी और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को देखते हुए ये कदम जरूरी बताया गया है
सजा का पूरा लेखा-जोखा
अपराध सजा
मनी गेम्स की पेशकश/सुविधा देना 3 साल तक जेल या ₹1 करोड़ जुर्माना
विज्ञापन करना 2 साल तक जेल या ₹50 लाख जुर्माना
पैसे का लेन-देन 3 साल तक जेल या ₹1 करोड़ जुर्माना
अपराध दोहराना 3-5 साल की सजा + ₹2 करोड़ तक जुर्माना
ध्यान दें: ये अपराध गंभीर (संज्ञेय) और गैर-जमानती माने जाएंगे।
जांच एजेंसियों को मिलेंगे विशेष अधिकार
अधिकारी बिना वारंट के छापा, तलाशी और गिरफ्तारी कर सकेंगे
डिजिटल डेटा और संपत्तियों को जब्त करने का भी अधिकार होगा
ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को मिलेगा सरकारी साथ
पहली बार, ई-स्पोर्ट्स को कानूनी मान्यता दी जा रही है
युवा मामले और खेल मंत्रालय इसके लिए एक ढांचा तैयार करेगा
सोशल गेम्स, यानी मनोरंजन और जुड़ाव बढ़ाने वाले गेम्स को प्रोत्साहन मिलेगा
सरकार क्यों लाई ये बिल?
लगातार सामने आ रही हैं ऑनलाइन मनी गेम्स से आत्महत्या, हिंसा और ठगी की खबरें
कई परिवार कर्ज़ और बर्बादी का शिकार हुए
सरकार मानती है कि ये एक सामाजिक समस्या बन चुकी है
समाधान: जोखिम भरे गेम्स पर रोक और सुरक्षित गेमिंग का समर्थन