पूजा पाल की जान पर मंडरा रहा खतरा, अखिलेश यादव ने उठाए बड़े सवाल

समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल ने हाल ही में खुलकर अपनी जान को खतरे में बताया है और चेतावनी दी है कि अगर उनकी हत्या होती है, तो इसके लिए पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव जिम्मेदार होंगे। इस गंभीर मुद्दे पर रविवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया।
अखिलेश यादव ने कहा, “किसी मुख्यमंत्री से मिलने वाला व्यक्ति अगर दूसरे दल के नेता से जान का खतरा महसूस करे, तो यह राजनीति और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है। अगर भाजपा इस कृत्य को अंजाम देगी, तो हमें जेल जाना पड़ेगा, लेकिन सच सबके सामने आएगा।”
उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूजा पाल को राजनीतिक खेल का मोहरा बनाया जा रहा है ताकि सपा की छवि खराब की जा सके। “जब तक वह हमारे साथ थीं, उन्हें किसी भी तरह का खतरा नहीं था। अब अचानक खतरे की बात क्यों? यह स्पष्ट है कि भाजपा इस मुद्दे का गलत फायदा उठा रही है।”
सपा प्रमुख ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में संज्ञान लेने और जांच कराने की मांग की। “हमने गृह मंत्रालय को पत्र भेजा है और उम्मीद करते हैं कि निष्पक्ष जांच होगी। यूपी सरकार पर हमारा भरोसा कम है, इसलिए केंद्र सरकार को कदम उठाना चाहिए।”
पूजा पाल का पत्र: आरोप और आशंकाएं
पूजा पाल ने शुक्रवार को एक पत्र के जरिए पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी के कुछ सदस्य सोशल मीडिया पर उन्हें गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पति के हत्यारों को सजा मिल चुकी है, और अब अगर उन्हें भी कोई नुक़सान पहुंचता है, तो वह अपनी मौत को भी स्वीकार करेंगी।
अपने पत्र में पूजा पाल ने लिखा, “मुझे इस तरह बीच रास्ते में अपमानित कर मरने के लिए छोड़ दिया गया है, जिससे सपा के कुछ अनुयायियों का मनोबल बढ़ा है। अगर मेरी हत्या होती है, तो इसका दोषी केवल अखिलेश यादव होंगे।”
राजनीतिक संकट और आने वाले संघर्ष की संभावना
पूजा पाल और अखिलेश यादव के बीच इस विवाद ने समाजवादी पार्टी के भीतर गहरे संकट को उजागर कर दिया है। राजनीतिक दावपेंच के बीच, प्रदेश की कानून व्यवस्था और सियासी सुरक्षा पर उठ रहे सवाल केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
क्या इस मामले में सच्चाई सामने आएगी, और राजनीति की इस जंग में कौन जीतेगा — ये आगे आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल, सपा और भाजपा दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने राजनीतिक एंगल से देख रहे हैं, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।