छत्तीसगढ़ को ‘ऊर्जा राजधानी’ बनाने की तैयारी तेज, 3.4 लाख करोड़ के निवेश से 32,100 मेगावाट नई परियोजनाओं का रोडमैप

नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रदेश के ऊर्जा सेक्टर की मौजूदा स्थिति और आगामी रणनीति का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि उत्पादन, पारेषण और वितरण—तीनों स्तरों पर राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी और निजी उत्पादकों सहित प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30,671.7 मेगावाट पहुंच चुकी है। इसमें 28,824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत और 2,047 मेगावाट सौर व बायोमास जैसे नवीकरणीय स्रोतों से शामिल हैं।
भारत सरकार के नेट जीरो लक्ष्य के अनुरूप वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने की दिशा में राज्य भी कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 2023 की नीति लागू की गई है। 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से पांच की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5,000 मेगावाट की परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के तहत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम में करीब 2,000 मेगावाट की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। कोरबा क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसी आधुनिक परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
सरकार ने 32,100 मेगावाट नई परियोजनाओं के लिए एमओयू किए हैं, जिनमें ताप, न्यूक्लियर, फ्लोटिंग सोलर और पंप स्टोरेज शामिल हैं। इससे लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता खुला है।
पारेषण क्षेत्र में उपकेन्द्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है और 5,200 किमी ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के जरिए 131 उपकेन्द्र डिजिटल नेटवर्क से जोड़े गए हैं। वितरण क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो चुकी है।
क्रेडा द्वारा दो वर्षों में 26,794 सोलर सिंचाई पंप और 7,833 सोलर पेयजल पंप स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और पीएम कुसुम जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
ऊर्जा सचिव ने स्पष्ट किया कि संतुलित ऊर्जा मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण और नवीकरणीय विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।




