मौत से लौटकर जिंदगी: बॉडी बैग में हरकत और दुनिया रह गई दंग

मौत के बाद क्या होता है—इस सवाल ने इंसान को हमेशा हैरान किया है। कई कहानियां सुनी जाती हैं, मगर कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो यकीन और विज्ञान, दोनों की सीमाएं हिला देती हैं। साल 2014 में अमेरिका के मिसिसिप्पी राज्य में हुआ एक वाकया आज भी रोंगटे खड़े कर देता है।
78 वर्षीय किसान वाल्टर विलियम्स उर्फ ‘स्नोबॉल’ को 26 फरवरी 2014 की रात कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के चलते होस्पिस में मृत घोषित कर दिया गया। न पल्स मिली, न सांस। परिवार गम में डूबा था। कागजी कार्रवाई पूरी हुई और शव को बॉडी बैग में बंद कर अंतिम संस्कार गृह भेज दिया गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
अगली सुबह एम्बाल्मिंग रूम में जैसे ही प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, बॉडी बैग अचानक हिलने लगा। स्टाफ की आंखें फटी रह गईं—वाल्टर ने पैर हिलाए, सांस लेने लगे। तुरंत एम्बुलेंस बुलाई गई। जांच में दिल की धड़कन लौट चुकी थी। डॉक्टरों का मानना था कि इंप्लांटेड पेसमेकर या दवाओं के असर ने वाइटल साइन कुछ देर के लिए छिपा दिए थे।
20 साल के करियर में पहली बार ऐसा देखने वाले कोरोनर ने इसे चमत्कार बताया। परिवार के लिए यह किसी सपने से कम नहीं था। बेटी ने बताया कि होश में आने पर वाल्टर ने मासूमियत से पूछा—“तुम लोग चुप क्यों हो गए थे?”
मेडिकल साइंस में इस दुर्लभ घटना को ‘लाजरस सिंड्रोम’ कहा जाता है, जहां मौत घोषित होने के बाद भी शरीर में अपने आप सर्कुलेशन लौट आता है। इतिहास में ऐसे गिने-चुने मामले दर्ज हैं।
वाल्टर इस चमत्कार के बाद कुछ दिन परिवार के साथ रहे, पोते-पोतियों से मिले। मगर किस्मत को कुछ और मंजूर था। 15 दिन बाद, 14 मार्च 2014 को वे हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो गए।
एक ऐसी कहानी, जिसने दिखा दिया कि कभी-कभी जिंदगी खुद मौत को भी चौंका देती है।




