रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में रविवार को भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे ने नई हलचल पैदा कर दी है। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद पार्टी संगठन आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी में अभी से जुटता दिखाई दे रहा है। स्मृति ईरानी के दो दिवसीय प्रवास को केवल औपचारिक संगठनात्मक दौरा नहीं, बल्कि सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, स्मृति ईरानी और प्रदेश सह प्रभारी सिद्धार्थ शंभू 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर में रहेंगे। इस दौरान कुल 12 महत्वपूर्ण बैठकों का कार्यक्रम बताया गया है। इन बैठकों में प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों, संभाग प्रभारियों, सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा होनी है।
राजनीतिक रूप से इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हारी हुई 36 सीटों पर फोकस है। इन क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति, संगठन की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों के कामकाज को लेकर समीक्षा की तैयारी बताई गई है।
सवाल यह है कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, तब पार्टी को इतनी जल्दी मिशन 2028-29 की रणनीति बनाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? क्या पार्टी आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करना चाहती है या फिर उन क्षेत्रों में अपनी कमजोरियों को दूर करने की तैयारी कर रही है जहां उसे पिछली बार हार का सामना करना पड़ा था?
इस दौरे को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा पर निशाना साधा है। विपक्ष की ओर से महंगाई और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने स्मृति ईरानी के पुराने राजनीतिक बयानों को भी चर्चा में लाते हुए भाजपा से जवाबदेही की मांग की है।
दूसरी तरफ भाजपा के लिए यह दौरा संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है। बैठकों में सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, संगठन और सरकार के बीच तालमेल तथा कार्यकर्ताओं से मिलने वाले फीडबैक जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
स्मृति ईरानी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब प्रदेश की राजनीति में विपक्ष लगातार सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के लिए केवल बैठकें करना पर्याप्त नहीं होगा। संगठनात्मक फैसलों का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देना भी जरूरी होगा।
हालांकि, मंत्रिमंडल में फेरबदल, नेताओं को हटाने या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की आधिकारिक घोषणा को लेकर अभी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इन बैठकों को लेकर चल रही अटकलों को वास्तविक फैसले के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
स्मृति ईरानी के इस दौरे का असली राजनीतिक संदेश बैठकों के बाद सामने आने वाले फैसलों से स्पष्ट होगा। क्या भाजपा हारी हुई सीटों पर नई रणनीति बनाएगी? क्या मंत्रियों और विधायकों की जवाबदेही तय होगी? फिलहाल छत्तीसगढ़ की राजनीति की निगाहें भाजपा के इस मंथन पर टिकी हैं।
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