देश की ताज़ा खबरें | Fourth Eye News

195 देशों का जलवायु समझौता: दुनिया बचाने की डील या सिर्फ कागजी वादा?

दुनिया के 195 देशों ने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए एक बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत देशों ने 2035 तक कार्बन उत्सर्जन को 55 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य तय किया है।

रिपोर्टों के अनुसार विकसित देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हर साल लगभग 200 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देने का भी वादा किया है। इस फंड का उपयोग जलवायु अनुकूलन, हरित ऊर्जा और पर्यावरणीय संरक्षण परियोजनाओं में किया जाएगा।

इस समझौते में पहले के कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों की तुलना में अधिक कड़े निगरानी तंत्र शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदस्य देश अपने वादों को वास्तव में लागू करें।

हालांकि कई विशेषज्ञ इस समझौते को लेकर संदेह भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले कई वैश्विक जलवायु समझौते भी बड़े वादों के साथ हुए थे, लेकिन कई देशों ने अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं किया।

पर्यावरण संगठनों का कहना है कि यह समझौता सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी। यदि देशों ने अपने वादों को लागू नहीं किया तो जलवायु परिवर्तन का संकट और गंभीर हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक तापमान को नियंत्रित रखने के लिए इस तरह के समझौतों को सिर्फ घोषणाओं से आगे बढ़कर वास्तविक नीतियों में बदलना होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button