मिडिल ईस्ट में जंग के बादल: ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, ‘अगला हमला होगा और भी खतरनाक’

मिडिल ईस्ट एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तेहरान परमाणु समझौते पर बातचीत की मेज पर नहीं आया, तो अगला सैन्य हमला पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा। इसी के साथ अमेरिका का ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन अपने तीन घातक डिस्ट्रॉयर—USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS स्प्रुअंस और USS माइकल मर्फी—के साथ मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ शब्दों में लिखा कि ईरान के पास अब वक्त नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जाएंगे। ट्रंप का दावा है कि अगर ईरान बातचीत से पीछे हटता है, तो अमेरिका की कार्रवाई “बहुत बुरी” होगी।
ट्रंप ने जून 2025 में हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों का हवाला देते हुए कहा कि उस वक्त ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को तबाह कर दिया गया था। हालांकि, जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट स्टेनली जॉनी का कहना है कि ट्रंप के बयान आपस में उलझे हुए हैं। उनका सवाल है कि जब ट्रंप पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का दावा कर चुके हैं, तो अब नई डील की जरूरत क्यों पड़ रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की असली चिंता परमाणु हथियार नहीं, बल्कि ईरान की बढ़ती क्षेत्रीय ताकत है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अगर ईरान नहीं माना, तो अमेरिकी सेना पूरी ताकत से कार्रवाई करेगी।
दूसरी ओर, ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के सलाहकार अली शामखानी ने साफ चेतावनी दी है कि अमेरिका या उसके सहयोगियों की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब बेहद कठोर होगा। विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने भी कहा है कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और किसी भी हमले का तुरंत जवाब दिया जाएगा।
ईरान ने यह भी दोहराया कि वह केवल सम्मानजनक और बराबरी के आधार पर होने वाली परमाणु डील के लिए तैयार है, न कि धमकी या दबाव में। वहीं ईरानी मीडिया का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिका से किसी तरह की सीधी बातचीत नहीं हुई है।
हालात को देखते हुए साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली बेड़ा, टॉमहॉक मिसाइलों से लैस युद्धपोत और संभावित परमाणु पनडुब्बी की मौजूदगी इस बात के संकेत हैं कि आने वाले दिन दुनिया के लिए बेहद संवेदनशील हो सकते हैं।




