मारवाही कैंपा घोटाले पर सदन में हंगामा: विधायक दलेश्वर साहू के आरोपों पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा—जांच जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कैंपा मद के तहत मारवाही वन मंडल क्षेत्र में हुए क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण और गोबर खाद आपूर्ति के मामले पर जोरदार बहस देखने को मिली।
विधायक दलेश्वर साहू ने सदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2 मई 2022 से 11 मई 2022 के बीच मारवाही क्षेत्र में गोबर खाद आपूर्ति के नाम पर भुगतान किए गए वाउचरों में तिथियों को लेकर बड़ा विरोधाभास है। उन्होंने बताया कि एक वाउचर में 27 जून 2022 की तिथि दर्ज है, जबकि कंप्यूटर जनरेटेड फुटर में 4 मई 2024 की तिथि अंकित है।
उन्होंने मंत्री से पूछा कि आखिर सही तिथि कौन सी है? उप वन मंडल कार्यालय पेंड्रा द्वारा भेजा गया वाउचर सही है या कंप्यूटर से जनरेट दस्तावेज?
वन मंत्री केदार कश्यप ने जवाब देते हुए कहा कि 6 जनवरी 2026 को फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत प्राप्त हुई थी। यह शिकायत दिनेश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ जन सहयोग संस्थान द्वारा की गई थी। शिकायत के आधार पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति में मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर के माध्यम से वन मंडलाधिकारी कटघोरा, आईएफएस अधिकारी कुमार निशांत, उपमंडलाधिकारी पाली अविनाश इमानुल और हितेश ठाकुर शामिल हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच जारी है और रिपोर्ट प्राप्त होते ही विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन विधायक दलेश्वर साहू ने दावा किया कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट उपलब्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि “जांच प्रक्रियाधीन है” कहकर सदन को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी दोषी पाया गया है तो तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस पर सदन में तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। विधायक ने रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने की अनुमति मांगी, लेकिन सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बिना पूर्व सूचना और अनुमति के कोई भी दस्तावेज पटल पर नहीं रखा जा सकता।
नेता प्रतिपक्ष ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि जांच में दोष सिद्ध होता है तो मंत्री स्पष्ट आश्वासन दें कि सख्त कार्रवाई होगी।
मंत्री केदार कश्यप ने दोहराया कि आधिकारिक रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के साथ बैठक की गई है और रिपोर्ट जल्द आएगी। साथ ही आश्वस्त किया कि अगले सत्र से पहले इस पर कार्रवाई की दिशा स्पष्ट कर दी जाएगी।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या जांच पूरी हो चुकी है या अभी प्रक्रियाधीन है? और यदि दोष सिद्ध होता है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
फिलहाल, मामला जांच रिपोर्ट पर टिका है और सरकार ने रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है।




