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नोबेल पुरस्कार मिलते ही भड़का अमेरिका: मानवाधिकार पूर्व जज पर पाबंदियों का ऐलान कर अंतरराष्ट्रीय अदालत को लपेटा

वैश्विक न्यायपालिका और महाशक्तियों के बीच टकराव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) की पूर्व जज और दिग्गज मानवाधिकार वकील नवी पिल्ले पर अचानक कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। हैरानी की बात यह है कि यह सनसनीखेज कदम ठीक उस समय उठाया गया जब 85 वर्षीय दक्षिण अफ़्रीकी न्यायविद् नवी पिल्ले को उनके अदम्य मानवाधिकार कार्यों के लिए प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया है। अमेरिका के इस आक्रामक रुख ने वैश्विक मंच पर तहलका मचा दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस फैसले का ऐलान करते हुए अंतरराष्ट्रीय अदालत को सीधे तौर पर “दुष्ट” (Rogue) करार दिया है। बता दें कि नवी पिल्ले वही शख्सियत हैं जिन्होंने इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष के दौरान गाजा में मानवाधिकारों के उल्लंघन और कथित नरसंहार की संयुक्त राष्ट्र की जांच का नेतृत्व किया था। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इस आयोग के निष्कर्षों को हमेशा खारिज किया है। नोबेल पुरस्कार मिलने के तुरंत बाद अमेरिका द्वारा इस प्रकार के प्रतिबंध थोपा जाना यह साबित करता है कि महाशक्तियां वैश्विक न्याय संस्थानों के फैसलों को कुचलने से भी बाज नहीं आ रही हैं।

इस तीखे विवाद के बाद दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी भर्त्सना की है। उनका कहना है कि स्वतंत्र न्याय और निष्पक्ष जांच करने वाले जजों को डराने की यह एक गंदी राजनीतिक साजिश है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इस अंतरराष्ट्रीय घमासान के बाद वैश्विक अदालतें और मानवाधिकार संगठन अमेरिका के इस दबाव के आगे झुकते हैं या मुकाबला करते हैं।

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