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जब उद्योग मंत्री की क्षमता पर उठाया था रमन सिंह ने सवाल, कोंग्रेसियों ने बताया था 80 लाख आदिवासियों की आवाज़ !

फोर्थ आई न्यूज़

फोर्थ आई न्यूज़ ने हाल ही में आपको हमारे छत्तीसगढ़ सरकार के सबसे लोकप्रिय मंत्री कवासी लखमा की जीवनी और उनके संघर्ष पर एक स्पेशल स्टोरी दिखाई थी, अगर आप चाहें तो ऊपर आई बटन क्लिक करके उसे देख सकते हैं। हमने आपको बताया था कि किस तरह से पढ़े-लिखे ना होने के बावजूद कवासी लखमा अपने बस्तर क्षेत्र से एक कुशल नेतृत्वकर्ता बनकर उभरे। आज वो भूपेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। मगर एक वाक्या ऐसा भी हुआ जब कवासी लखमा की क्षमता को लेकर सवाल उठने लगे थे और यह सवाल उठाया था छत्तीसगढ़ में बीजेपी के 15 सालों के शासनकाल में मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह ने।

जी हाँ, यह बात साल 2021 की है, कांग्रेस ने वनवास खत्म करते हुए सत्ता में वापसी कर ली थी, और बीजेपी कांग्रेस के बीच वार-पलटवार का दौर जारी था, उद्योग मंत्री कवासी लखमा तो लगातार विपक्ष के सवालों का जवाब अपने चुटीले अंदाज़ में दे रहे थे, और उनके निशाने पर सीधे-सीधे डॉ रमन सिंह हुआ करते थे जो आज भी हैं। ऐसे ही एक बयान देते हुए कवासी लखमा ने पूर्व सीएम को घेर लिया यह बात डॉ रमन सिंह को इतनी चुभ गई की उन्होनें सीधे-सीधे कवासी लखमा की क्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिया। डॉ रमन सिंह ने कहा था कि इस मंत्री के पास सोच, समझ नहीं है। उन्हें खुद नहीं पता होता कि क्या कह रहे हैं।

रमन सिंह का यह बयान आया ही था कि पूरी प्रदेश कांग्रेस आक्रामक हो गई। पूर्व CM डॉ. रमन सिंह के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि कवासी लखमा प्रदेश के 80 लाख आदिवासियों की आवाज हैं। उनकी क्षमता को आंकना छत्तीसगढ़ की 31 फीसदी आबादी की क्षमता को आंकना है। कहा, रमन सिंह के अहंकारी व्यवहार के कारण ही भाजपा 14 सीटों पर सिमट गई है। भिलाई शहर विधायक और PCC प्रवक्ता देवेंद्र यादव ने कहा कि कवासी लखमा बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोंटा विधानसभा से विधायक हैं। वह आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ के एक सरल, सीधे व्यक्तित्व के धनी किसान नेता हैं। डॉ. रमन सिंह और उनकी टीम लगातार मंत्री लखमा की क्षमता को लेकर गलती करती है। इसी का नतीजा है कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक आदिवासियों ने कमल के फूल को जड़ समेत उखाड़ फेंका है। उन पर पूर्व मुख्यमंत्री की ऐसी टिप्पणी अशोभनीय है और आदिवासियों के प्रति उनकी सोच का परिचय देती है। डॉ. रमन सिंह को अपने विचारों को लेकर आत्ममंथन करने की जरूरत है।

आपको इस पूरे विवाद की पृष्टभूमि और विस्तार से बताते हैं दरअसल, सारा विवाद बस्तर में धर्मांतरण के मुद्दे और उसे लेकर हुआ था, भाजपा की तत्कालीन प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी ने बस्तर में हो रहे धर्मांतरण के लिए प्रदेश सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया था जिसके बाद इस क्षेत्र से आने वाले आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने बयान दिया कि डी. पुरंदेश्वरी हैदराबाद से हवाई जहाज से आई हैं। व्हाट्सएप में आई खबरों को ही देखा है। पुरंदेश्वरी ने बस्तर का क्षेत्र नहीं देखा है। बस्तर में कांग्रेस सरकार आने के बाद कोई धर्मांतरण नहीं हुआ है। आदिवासी लोग बहुत संगठित हैं।

कवासी लखमा के इसी बयान पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा था कि कवासी लखमा की ना सोच है, और ना समझ है। ना ही जानकारी है कि पुरंदेश्वरी जी कहां से आती हैं। उनका क्या बैकग्राउंड है, वो किस परिवार से आती है। किस प्रकार से वो सांसद के रूप में कार्य करके आई हैं। अब उस मंत्री के बारे में क्या कहा जाए, जो खुद यह नहीं जानते कि वो क्या कह रहे हैं। लेकिन कांग्रेस की तरफ से आए पलटवार के बाद इस मामले को और हवा मिल गई थी। तब से लेकर आज के दिन तक कवासी लखमा और रमन सिंह दोनों ही एक दूसरे को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

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