जब ज़िंदगी की राह थी बंद, डॉक्टरों ने खोल दी उम्मीद की खिड़की

रायपुर। प्रकृति ने महिलाओं के शरीर को एक खास ताकत दी है—नवजीवन को जन्म देने की शक्ति। इसी की पहली सीढ़ी होती है पीरियड्स की शुरुआत, जो युवावस्था में कदम रखते ही लड़की के जीवन में दस्तक देते हैं। मगर छत्तीसगढ़ की एक 14 साल की बच्ची के साथ जो हुआ, वह आम नहीं था।
माता-पिता तब चिंतित हो उठे जब उम्र बढ़ने के बावजूद बेटी को मासिक धर्म नहीं आया। पेट में लगातार सूजन और असहजता की शिकायत ने उन्हें चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचा दिया। यहां जो सामने आया, वो न सिर्फ चौंकाने वाला था बल्कि मेडिकल इतिहास में भी दुर्लभ था।
जांच में पता चला कि बच्ची के शरीर में जन्म से ही एक रुकावट थी—उसकी योनि की झिल्ली (हाइमन) पूरी तरह बंद थी। मेडिकल भाषा में इसे “इपरफ़ोरेट हाइमन” कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि शरीर के भीतर मासिक स्राव बन तो रहा था, मगर बाहर निकलने का रास्ता बंद था। यही कारण था कि बच्ची के पेट में सूजन हो रही थी।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अंजना चौधरी के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी के जरिए हाइमन में एक छोटा सा छेद बनाकर यह रुकावट दूर की। इसके बाद ही बच्ची का मासिक धर्म सामान्य रूप से शुरू हो सका।
डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति बहुत दुर्लभ होती है और इसका जल्द इलाज जरूरी होता है, वरना शरीर के अंदर जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
इस मामले ने न सिर्फ एक बच्ची को राहत दी, बल्कि ऐसे मामलों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी काम किया। माता-पिता के सजग रवैये और डॉक्टरों की मेहनत ने इस बच्ची को एक सामान्य और स्वस्थ जीवन की ओर लौटा दिया।




