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अब इलाज के साथ सुकून भी: छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के परिजनों के लिए बनेंगे आधुनिक विश्राम गृह

रायपुर। जब घर में कोई गंभीर बीमारी आ जाए, तो दर्द सिर्फ मरीज तक सीमित नहीं रहता—पूरा परिवार उसकी चपेट में आ जाता है। खासकर वे गरीब परिवार, जो दूर-दराज़ गांवों से इलाज के लिए शहर पहुंचते हैं, उनके लिए सबसे बड़ी जंग इलाज के साथ रहने की जगह ढूंढना होता है। कई बार मरीज अस्पताल के बेड पर होता है और उसके अपने लोग ठंडी सीढ़ियों, गलियारों या खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर होते हैं।

इसी मानवीय सच्चाई को समझते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक संवेदनशील और सराहनीय पहल की है। राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब मरीजों के परिजनों के लिए सर्वसुविधायुक्त ‘विश्राम गृह’ बनाए जाएंगे, ताकि मजबूरी में किसी को भी असुरक्षित हालात में रात न बितानी पड़े।

नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में मेडिकल एजुकेशन विभाग और सेवादान आरोग्य फाउंडेशन के बीच हुए एमओयू के तहत इस योजना को जमीन पर उतारा जाएगा। खास बात यह है कि विश्राम गृहों के निर्माण से लेकर उनके संचालन तक की पूरी जिम्मेदारी संस्था स्वयं निभाएगी। इससे सरकार और सामाजिक संस्था मिलकर एक ऐसा मानवीय ढांचा तैयार करेंगी, जहां परिजनों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहद किफायती ठहराव मिल सकेगा।

इन विश्राम गृहों में केवल छत ही नहीं, बल्कि 24 घंटे सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी, साफ-सुथरा भोजन और गरिमापूर्ण माहौल भी उपलब्ध होगा। योजना के पहले चरण में रायपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ और जगदलपुर के मेडिकल कॉलेजों को शामिल किया गया है, जहां दूरस्थ इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं।

यह पहल साबित करती है कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ दवा और डॉक्टर तक सीमित नहीं, बल्कि उन लोगों की चिंता भी है जो अपने बीमार अपनों के लिए ढाल बनकर खड़े रहते हैं। यह कदम न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था को मानवीय बनाएगा, बल्कि हजारों परिवारों को मानसिक सुकून और सम्मानजनक सहारा भी देगा।

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