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डिजिटल व्यवस्था से बदली धान खरीदी की तस्वीर, ‘तुंहर टोकन’ से किसानों को सीधा फायदा

Digitalisation has transformed paddy procurement, with farmers benefiting directly from the 'Tunhar Token'.

रायपुर। प्रदेश में धान खरीदी व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और डिजिटल हो गई है। नई तकनीक के प्रभावी उपयोग से किसानों के लिए धान विक्रय की प्रक्रिया सरल, सुगम और समयबद्ध बन रही है, जिसका सीधा लाभ खेतों से लेकर उपार्जन केंद्रों तक दिखाई दे रहा है।

सरगुजा जिले सहित प्रदेश के कई इलाकों में किसान ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे 24×7 टोकन प्राप्त कर रहे हैं। इससे उपार्जन केंद्रों पर लंबी कतारों और अनावश्यक इंतजार की समस्या खत्म हो गई है। किसानों का समय, श्रम और खर्च—तीनों की बचत हो रही है, वहीं पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद बन रही है।

अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत भकुरा के मध्यम वर्गीय किसान अभिषेक पैकरा बताते हैं कि इस साल अच्छी बारिश के कारण धान की पैदावार बेहतर हुई है। उनके पास कुल 217 क्विंटल धान है, जिसमें से उन्होंने ‘तुंहर टोकन’ ऐप के माध्यम से 119.60 क्विंटल धान के लिए पहला टोकन घर बैठे हासिल किया।

निर्धारित तिथि पर जब वे परसा धान उपार्जन केंद्र पहुंचे तो गेट पास जारी हुआ, नमी परीक्षण किया गया और तुरंत बारदाना उपलब्ध कराया गया। केंद्र में पेयजल, बैठने और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी मौजूद थीं, जिससे पूरी प्रक्रिया सहज और परेशानी-मुक्त रही।

किसान अभिषेक पैकरा के अनुसार राज्य सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी की जा रही है। इससे किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। धान विक्रय से मिली राशि से वे अब गेहूं, तिलहन और सब्जी जैसी अन्य फसलों की खेती भी कर पा रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत खुल रहे हैं।

प्रदेशभर में प्रशासन द्वारा धान उपार्जन केंद्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। नतीजतन, धान खरीदी अभियान तेजी, पारदर्शिता और किसान संतोष के साथ आगे बढ़ रहा है।