गुरुकुल की भावना से आधुनिक शिक्षा तक: अखरा स्कूल के वार्षिकोत्सव में सर्वांगीण विकास पर जोर

रायपुर। आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और शिष्टाचार का समावेश आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। गुरुकुल परंपरा की मूल भावना को आत्मसात करते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना समय की मांग है। ये विचार छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा ने पीएम श्री प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला अखरा (पाटन), जिला दुर्ग के वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि पीएम श्री विद्यालय की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त, गुणवत्तापूर्ण और समग्र शिक्षा प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत केवल पाठ्यक्रम आधारित पढ़ाई ही नहीं, बल्कि संगीत, खेल और योग जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। उनका मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह चरित्र निर्माण और अनुशासन के साथ जुड़ी हो।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जितेंद्र वर्मा ने की। शाला प्रबंधन समिति ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ, शाल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर आत्मीय स्वागत किया।
वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, योगासन और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा। समारोह के दौरान शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, शिक्षक और बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब आधुनिक शिक्षा और संस्कार साथ चलते हैं, तभी सच्चे अर्थों में विद्यार्थियों का समग्र विकास संभव है।



