मिडिल ईस्ट में युद्ध की आंच से कांपी दुनिया तेल 100 डॉलर पार क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में

मिडिल ईस्ट में तेजी से बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हिला कर रख दिया है। हाल के दिनों में ईरान द्वारा क्षेत्र के कई बंदरगाहों, तेल टर्मिनलों और व्यापारी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने के बाद स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार इराक के बसरा तेल टर्मिनल पर हुए हमलों के बाद तेल संचालन रोकना पड़ा, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है।
हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में कई देशों ने एहतियात के तौर पर ऊर्जा सुविधाएं बंद कर दीं और नागरिकों को घरों में रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भी खतरा बढ़ गया है। कुछ जहाजों पर हमले की पुष्टि हुई है, जबकि कई ड्रोन और मिसाइल हमलों को खाड़ी देशों की रक्षा प्रणालियों ने बीच में ही रोक दिया।
इन घटनाओं का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है। इस संकट को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इतिहास का सबसे बड़ा रणनीतिक तेल भंडार जारी करने का फैसला किया है। अमेरिका ने भी अपने रणनीतिक भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल बाजार में छोड़ने की घोषणा की है ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। एशिया के कई देश, जो मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर हैं, इस संकट को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं।


