प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ बना नन्ही पीहू की नई जिंदगी की धड़कन, सफल हार्ट ऑपरेशन के बाद लौटी मुस्कान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए चलाया जा रहा स्वास्थ्य अभियान प्रोजेक्ट धड़कन कई परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रहा है। इस पहल के तहत अब तक अनेक बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पहचान कर उनका निःशुल्क इलाज कराया जा रहा है। इसी अभियान की बदौलत बिलासपुर जिले की 11 वर्षीय पीहू को भी नया जीवन मिला है।
बिलासपुर के ग्राम भोजपुरी में रहने वाली कक्षा छठवीं की छात्रा पीहू कराके लंबे समय से हृदय संबंधी समस्या से जूझ रही थी। दिल में समस्या होने के कारण उसे खेल-कूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में काफी परेशानी होती थी। इसी दौरान रायपुर जिला प्रशासन द्वारा पुलिस विभाग के कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आयोजित ‘प्रोजेक्ट छांव’ के तहत स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। पीहू के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और वर्तमान में जगदलपुर में पदस्थ हैं। शिविर के दौरान पीहू की भी जांच कराई गई।
जांच में हृदय से जुड़ी समस्या सामने आने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने उसे आगे के उपचार के लिए सत्य साईं हॉस्पिटल, नवा रायपुर भेजा। वहां डॉक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद एक सप्ताह के भीतर उसका सफल ऑपरेशन किया। इलाज के बाद पीहू को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर बिलासपुर स्थित अपने घर में सामान्य जीवन जी रही है।
आज पीहू फिर से पढ़ाई-लिखाई में मन लगा रही है और अपनी बहनों व दादी के साथ कैरम और अन्य खेलों का आनंद भी ले रही है।
पीहू की मां इंद्राणी कराके ने बताया कि समय पर इलाज संभव होने से उनकी बेटी की जिंदगी बच गई। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य टीम का आभार जताते हुए कहा कि प्रोजेक्ट धड़कन जैसे अभियान जरूरतमंद बच्चों के लिए नई उम्मीद लेकर आए हैं।
यह पहल राज्य में जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों के लिए न केवल इलाज का रास्ता खोल रही है, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में भरोसा और राहत भी ला रही है।




